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(अपडेट) पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल 13 अप्रैल तक रिमांड पर

जयपुर, 10 अप्रैल । एसीबी मामलों की विशेष अदालत क्रम-1 ने जल जीवन मिशन में हुए करीब 960 करोड रुपये के घोटाले से जुडे मामले में पूर्व आईएएस और तत्कालीन अतिरिक्त जलदाय सचिव सुबोध अग्रवाल को 13 अप्रैल तक रिमांड पर एसीबी को सौंप दिया है। हाल ही में अदालत की ओर से आरोपित सुबोध अग्रवाल को भगोड़ा घोषित करने के बाद एसीबी ने उसे गिरफ्तार किया था।

एसीबी की ओर से आरोपित सुबोध अग्रवाल को अदालत में पेश कर पांच दिन का रिमांड मांगा। एसीबी की ओर से कहा गया कि आरोपित से प्रकरण को लेकर पूछताछ करनी है। वहीं यह भी जानकारी हासिल की जाएगी की इस घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। वहीं सुबोध अग्रवाल के वकील ने पुलिस रिमांड का विरोध किया। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने आरोपित को 13 अप्रैल तक पुलिस रिमांड पर सौंप दिया है। बाहर आकर सुबोध अग्रवाल ने कहा कि उन्हें न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा है, सत्यमेव जयते।

जल जीवन मिशन घोटाले को लेकर एसीबी ने पूर्व में तत्कालीन जलदाय मंत्री महेश जोशी और ठेका फर्म के संचालकों को गिरफ्तार किया था। जिन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी। वहीं गत दिनों एसीबी ने जलदाय विभाग के वर्तमान और पूर्व अधिकारियों दिनेश गोयल, कृष्णदीप गुप्ता, शुभांशु दीक्षित, सुशील शर्मा, विशाल सक्सेना, अरुण श्रीवास्तव, डीके गौड, महेन्द्र प्रकाश सोनी, निरिल कुमार और मुकेश पाठक को गिरफ्तार किया था। एसीबी कोर्ट इन सभी अधिकारियों की जमानत अर्जियों को खारिज कर चुकी है। इसके अलावा तीन अन्य आरोपित फरार चल रहे हैं

सुबोध अग्रवाल की ओर से मामले में अपने खिलाफ दर्ज एसीबी की इस एफआईआर को रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। गत 19 फरवरी को याचिका दायर होने के बाद नाटकीय घटनाक्रम में उनके अधिवक्ता ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र पेश कर अपना वकालतनामा वापस ले लिया। अब उनकी ओर से दूसरे अधिवक्ता पेश हो रहे हैं। सुबोध अग्रवाल का कहना है कि जलदाय विभाग के अधिकारी विशाल सक्सेना के बयान पर उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, जबकि मामले का खुलासा होने के बाद उसके कार्यकाल में विशाल पर कार्रवाई की गई थी।

उल्लेखनीय है कि जल जीवन मिशन घोटाले को लेकर एसीबी ने साल 2024 में एफआईआर दर्ज की थी। जांच में सामने आया की ठेका फर्म श्री गणपति ट्यूबवेल और श्री श्याम ट्यूबवेल के संचालकों ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कर पीएचईडी के अफसरों से मिलीभगत कर करीब 960 करोड रुपये के टेंडर हासिल किए।