बस्तर सांसद ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री काे पोटाकेबिन कर्मचारियों के संविलियन का सौंपा ज्ञापन
मुलाकात के दौरान बस्तर सांसद महेश कश्यप ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से आग्रह किया कि जिस प्रकार सरकार द्वारा आत्मसमर्पित माओवादियों के पुनर्वास हेतु विशेष कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, उसी तर्ज पर लोकतंत्र और शिक्षा के इन प्रहरियों के लिए भी स्थायी समायोजन’ की एक ठोस नीति तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने वर्तमान में कार्यरत 833 अनुदेशकों के परिवारों की आजीविका का हवाला देते हुए उनके शिक्षा विभाग में स्थायी संविलियन की मांग रखी। सांसद कश्यप ने तर्क दिया कि इन कर्मचारियों के पास बस्तर की स्थानीय बोलियों और वहां की जमीनी परिस्थितियों में शिक्षण का जो दीर्घकालिक अनुभव है, उसका लाभ सीधे तौर पर शिक्षा विभाग को मिलना चाहिए।
सांसद महेश कश्यप ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि बस्तर संभाग के लगभग 60 पोटाकेबिन विद्यालयों में विगत 15 -16 वर्षों से 833 अनुदेशक और भृत्य कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यह कर्मचारी उस कठिन दौर में भी शिक्षा की मशाल थामे रहे, जब नक्सली हिंसा के कारण सामान्य शाला भवनों का संचालन चुनौतीपूर्ण था। चर्चा के दौरान सांसद ने इस बात पर विशेष बल दिया कि कर्तव्य पथ पर चलते हुए पोटाकेबिन के कई अनुदेशक नक्सली हिंसा का शिकार होकर वीरगति को प्राप्त हुए हैं, अतः इन समर्पित कर्मियों के भविष्य को सुरक्षित करना केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि एक गहन मानवीय संवेदना का विषय है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सांसद महेश कश्यप की बातों को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ सुना और बस्तर के इन शिक्षा कर्मियों के योगदान की सराहना की। उन्होंने आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार करेगी और छत्तीसगढ़ राज्य शासन के समन्वय से इन कर्मचारियों के नियमितीकरण और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक कदम उठाएगी। सांसद कश्यप ने इस सकारात्मक आश्वासन हेतु केंद्रीय मंत्री का आभार व्यक्त किया और विश्वास जताया कि जल्द ही पोटाकेबिन के इन कर्मठ साथियों को न्याय मिलेगा।









