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भारत-पाक बॉर्डर के नोटिफाइड क्षेत्र में जमीन की रजिस्ट्री रद्द, बीकानेर कोर्ट का बड़ा फैसला

बीकानेर, 10 मार्च । बीकानेर जिला न्यायालय की एडीजे-5 अदालत ने भारत-पाक सीमा से सटे नोटिफाइड क्षेत्र में बिना अनुमति की गई जमीन की खरीद-फरोख्त को अवैध ठहराते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने पूगल क्षेत्र में वर्ष 2006 में हुई 7.58 हेक्टेयर कृषि भूमि की रजिस्ट्री को शून्य घोषित कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अधिसूचित सीमा क्षेत्र में सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना जमीन खरीदना-बेचना कानून के खिलाफ है, इसलिए ऐसी रजिस्ट्री प्रभावहीन मानी जाएगी।

अपर लोक अभियोजक शिवशंकर स्वामी ने बताया कि इस तरह के करीब 200 मामलों को जिला न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। इनमें से एक मामला राज्य सरकार बनाम दर्शन सिंह का था, जिसकी सुनवाई एडीजे-5 कोर्ट में हुई और 26 फरवरी 2026 को अदालत ने फैसला सुनाया। जांच में सामने आया कि दर्शन सिंह ने जमीन खरीदने से पहले जिला कलेक्टर और एसडीएम से प्रतिबंधित क्षेत्र में भूमि खरीदने की आवश्यक अनुमति नहीं ली थी, जबकि नोटिफाइड बॉर्डर एरिया में जमीन की खरीद-फरोख्त के लिए यह अनुमति अनिवार्य है।

मामले के अनुसार पूगल तहसील के गांव करकरी भासियान में खसरा नंबर 1275, 1314, 2663/1274 और 1278 की कुल 7.58 हेक्टेयर कृषि भूमि का सेल एग्रीमेंट 29 मई 2006 को सब-रजिस्ट्रार कार्यालय पूगल में दर्ज कराया गया था। बाद में इस जमीन के सौदे को लेकर विवाद सामने आने पर राज्य सरकार ने अदालत में वाद दायर किया।

राज्य सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि संबंधित भूमि अधिसूचित सीमा क्षेत्र में आती है, जहां जमीन की खरीद-फरोख्त से पहले सक्षम प्राधिकारी की अनुमति लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति की गई रजिस्ट्री कानून के विपरीत है, इसलिए इसे निरस्त किया जाना चाहिए। अदालत ने सुनवाई के दौरान भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 23 का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी समझौते का उद्देश्य कानून के विरुद्ध हो तो ऐसा समझौता स्वतः शून्य माना जाता है। कोर्ट ने 29 मई 2006 को सब-रजिस्ट्रार कार्यालय पूगल में दर्ज सेल एग्रीमेंट को अवैध और शून्य घोषित करते हुए रजिस्ट्री निरस्त करने के आदेश दिए तथा संबंधित भूमि को सरकारी नियंत्रण में रखने का निर्देश दिया।

उल्लेखनीय है कि बीकानेर जिले में भारत-पाकिस्तान सीमा से जुड़े बज्जू, पूगल, छत्तरगढ़ और खाजूवाला क्षेत्रों की सीमा से सटी जमीन को गृह मंत्रालय ने नोटिफाइड एरिया घोषित किया हुआ है। इन क्षेत्रों में जमीन खरीदने से पहले केंद्र सरकार की अनुमति आवश्यक होती है। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि खरीदार की जिम्मेदारी थी कि वह पहले यह सुनिश्चित करता कि जमीन अधिसूचित क्षेत्र में तो नहीं आती। बाद में यह तर्क नहीं दिया जा सकता कि उसे केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन की जानकारी नहीं थी।