एक-दूसरे विभाग पर जिम्मेदारी ना डाले, शपथ पत्र नहीं दिया तो कोर्ट को उठाने होंगे सख्त कदम-हाईकोर्ट
जयपुर, 09 मार्च । राजस्थान हाईकोर्ट ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती-2024 में न्यूनतम कट ऑफ नहीं रखने और शून्य अंक लाने वालों का चयन करने से जुडे मामले में प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से पेश शपथ पत्र पर नाराजगी जताई है। इसके साथ ही अदालत ने कहा कि एक-दूसरे विभाग पर जिम्मेदारी नहीं डाली जाए। यदि सात अप्रैल तक संबंधित विभाग का शपथ पत्र पेश नहीं किया गया तो कोर्ट को सख्त कदम उठाने होंगे। जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह टिप्पणी विनोद कुमार की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
सुनवाई के दौरान अदालती आदेश की पालना में प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से शपथ पत्र पेश किया गया। जिसमें कहा गया कि वह सिर्फ सफल अभ्यर्थियों को विभाग आवंटित करने का काम करता है। नियम बनाने और न्यूनतम योग्यता निर्धारित करने का काम कार्मिक विभाग और कर्मचारी चयन बोर्ड का है। ऐसे में कार्मिक विभाग और चयन बोर्ड को कोर्ट के आदेश से अवगत करवा कर सूचना मांगी गई है। इस पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने अतिरिक्त महाधिवक्ता कपिल प्रकाश माथुर को कहा कि उन्होंने संबंधित विभाग को शपथ पत्र पेश करने को कहा था और वे एएजी होने के नाते राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में एक-दूसरे पर जिम्मेदारी ना डालकर आगामी सुनवाई पर संबंधित विभाग का शपथ पत्र पेश करे।
याचिका में अधिवक्ता हरेंद्र नील ने बताया कि कर्मचारी चयन आयोग ने 12 दिसंबर 2024 को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के 52 हजार से अधिक पदों पर भर्ती निकली थी। जिसमें यह याचिकाकर्ता ने ओबीसी भूतपूर्व सैनिक श्रेणी में आवेदन किया था। लिखित परीक्षा में याचिकाकर्ता के नेगेटिव मार्क्स आए और गत 16 जनवरी को जारी परिणाम में उसे चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। याचिका में कहा गया की नियुक्ति के लिए भर्ती में कोई न्यूनतम अंक लाने की बाध्यता नहीं रखी गई थी। ऐसे में पद रिक्त रहने पर नेगेटिव अंक लाने वाले अभ्यर्थी का भी चयन किया जाना चाहिए था। याचिका में दावा किया गया कि भर्ती में एक वर्ग की कट ऑफ 0.003 आई है। ऐसे में याचिकाकर्ता को भी नियुक्ति दी जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ आश्चर्य जताते हुए संबंधित विभाग को इस संबंध में शपथ पत्र देने और इस स्थिति को सुधारने के लिए उठाने जाने वाले कदमों की जानकारी मांगी थी। इस दौरान अदालत ने माना था कि आरक्षित श्रेणी के लिए भी भर्ती में न्यूनतम मानक सुनिश्चित किए जाने चाहिए।









