बढ़ते तापमान में फसलों की सिंचाई पर ध्यान दें किसान : डॉ राजन
खूंटी, 07 मार्च । जिले में आने वाले दिनों में मौसम मुख्यतः शुष्क और साफ रहने की संभावना है।
मौसम पूर्वानुमान के अनुसार मार्च के मध्य तक बारिश की संभावना बेेेहद कम है। कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। इस दौरान अधिकतम तापमान धीरे-धीरे बढ़कर 35 से 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंंचने की संंभावना है।
यह जानकारी कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ राजन चौधरी ने शनिवार को दी।
उन्होंने बताया कि तापमान तेजी से बढ़ने से गेहूं सहित रबी की अन्य फसलों पर उच्च तापमान का प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अधिक तापमान के कारण दानों के भराव की प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे दाने छोटे और हल्के रह जाते हैं और पैदवार में कमी आ सकती है। इसके कारण फसलों पर हीट स्ट्रेस का प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए इससे बचाव के लिए किसान फसलों की सिंचाई और पोषण पर ध्यान दें, ताकि उत्पादन और दानों की गुणवत्ता बेहतर बनी रहे।
उन्होंने बताया कि किसान अधिकतम तापमान के प्रभाव को कम करने के लिए फसल में जरूरत के अनुसार हल्की सिंचाई करें, ताकि खेत में नमी बनी रहे। ध्यान रखें कि तेज हवा चलने के समय सिंचाई न करें, क्योंकि इससे फसल के गिरने की संभावना बढ़ जाती है।
साथ ही फसल में पोटाश की कमी हो और तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाए, तो पोटैशियम नाइट्रेट (13:45) का छिड़काव लाभकारी है। इसके उपयोग से उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है।
फसल में नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए 200 लीटर पानी में 4 किलोग्राम यूरिया घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव किया जा सकता है। इससे दानों के विकास में सहायता मिलती है और फसल स्वस्थ रहती है।
उन्होंने कहा कि किसानों से अपील की है कि बढ़ते तापमान के दौरान फसलों की नियमित निगरानी करें और समय पर हल्की सिंचाई एवं पोषण प्रबंधन अपनाकर उत्पादन को सुरक्षित रखें।









