नक्सल प्रभावित सुकमा में आरएएमपी योजना से स्थानीय उत्पादकों को डिजिटल मंच मिलेगा
महिला उद्यमियों को विशेष मार्गदर्शन देते हुए वक्ताओं ने कहा कि जब गांव की महिलाएं डिजिटल मंच पर कदम रखेंगी, तो सुकमा की पहचान हथियार नहीं बल्कि हुनर से होगी। तकनीकी विशेषज्ञों ने युवाओं को सोशल मीडिया और ई-मार्केटिंग की आधुनिक तकनीकें सिखाईं। आरएएमपी (एमएसएमई प्रदर्शन को बढ़ाना और तेज करना) योजना के तहत प्रशिक्षण, डिजिटल प्रमोशन और वित्तीय सहायता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। कार्यशाला में स्थानीय कारीगर, स्वयं सहायता समूह और नए उद्यमी बड़ी संख्या में शामिल हुए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से सुकमा के जंगलों से सिर्फ महुआ, तसर और हस्तशिल्प ही नहीं, बल्कि विकास की नई कहानी भी निकलेगी। यह कदम स्थानीय लोगों को रोजगार, पहचान और आत्मनिर्भरता की राह दिखाएगा।









