शिमला: शांता कुमार ने आवारा पशुओं पर सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप को सरकार और समाज की नाकामी बताया

शांता कुमार ने सोमवार को एक बयान में कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में सुप्रीम कोर्ट को इस मुद्दे पर विचार करना पड़ना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्हाेंने कहा कि एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक वर्ष में लगभग 37 लाख लोगों को कुत्तों ने काटा, जिनमें हजारों लोग घायल हुए और कुछ की जान भी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह सरकार और समाज की जिम्मेदारी नहीं बनती कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे?

शांता कुमार ने सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद करते हुए कहा कि अदालत ने केवल इतना कहा था कि इन कुत्तों को आश्रय स्थलों में रखा जाए। लेकिन इसके बाद देशभर में कुत्ता प्रेमियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए, जिससे अदालत को भी अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना पड़ा।

उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि भारत में गौ माता को पूज्य माना जाता है, लेकिन वही गायें और अन्य पशु सड़कों पर आवारा घूमते हैं, कूड़ा-कर्कट खाते हैं और कई बार सड़क हादसों का कारण बनते हैं। बावजूद इसके, सरकार और समाज ने कभी इस मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखाई।

शांता कुमार ने कहा कि यह समस्या सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान लेने से हल नहीं होगी। यह संविधान के अनुसार सरकार और समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी राज्य सरकारों से आग्रह किया कि इस विषय पर गंभीरता से विचार करें, समाज का सहयोग लें और अपनी जिम्मेदारी को निभाएं।