खंडेला में पानी संकट पर हंगामा, ग्रामीणों की शिकायत- सुनवाई की गुहार बेअसर!
खंडेला में हुई पंचायत समिति की उपखंड स्तरीय जनसुनवाई शिविर के दौरान, स्थानीय निवासियों ने पानी की गंभीर कमी के कारण जोरदार हंगामा किया। इस दौरान, लोगों ने अधिकारियों से स्पष्ट रूप से बात करते हुए मांग की कि क्षेत्र में उचित और निरंतर पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से पानी की समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा। एडवोकेट गोकुलचंद गोदारा ने इस विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि खंडेला शहर के वार्डों और आसपास की ग्राम पंचायतों में पीने के पानी की हालत बेहद खराब है।
पानी की कमी को लेकर जलदाय विभाग ने टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति शुरू की है, लेकिन इसका लाभ ग्रामीण क्षेत्रों तक नहीं पहुंच पा रहा है। नगर पालिका के कई वार्डों में जलापूर्ति की व्यवस्था भी ठीक से कार्य नहीं कर रही है। टैंकरों से घर-घर पानी पहुंचाना असंभव होने के कारण, लोगों ने सुझाव दिया कि हर वार्ड में पानी की टंकी स्थापित की जाए और टैंकरों द्वारा इन टंकियों में पानी भरा जाए।
इसके अलावा, खंडेला विधानसभा क्षेत्र की अधिकतर ग्राम पंचायतों में नरेगा योजना के अंतर्गत कार्य बंद हैं, जिससे गरीब मजदूरों के सामने बेरोजगारी की समस्या खड़ी हो गई है। लोग ग्राम पंचायत कार्यालयों के चक्कर काटते रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। उन पर नरेगा एक्ट के नियमों के उल्लंघन और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए गए हैं। केंद्र सरकार की मनरेगा गारंटी योजना के तहत काम की दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मजदूरों को रोजगार नहीं मिल रहा है। इस मुद्दे पर मजदूरों ने भी नरेगा के बंद कार्यों को पुनः शुरू करने की मांग की।
इस दौरान, नगर पालिका खंडेला ने अपनी भूमि पर कचरे के यार्ड को बंद कर, ग्राम पंचायत गुरारा की भूमि पर नया कचरा यार्ड बनाने का निर्णय लिया है। यह नया कचरा यार्ड धार्मिक स्थलों जैसे काठिया भैरव, कैमल माता, सुंदरदास जी महाराज और गोसाई महाराज के निकट स्थित है, जिससे वहां गंदगी फैलने का खतरा उत्पन्न हो गया है। स्थानीय लोगों ने इस भूमि के आवंटन को रद्द करने की मांग की है, ताकि उनके धार्मिक स्थलों पर कोई भी गंदगी का खतरा न रहे।
जनसुनवाई के दौरान अधिशासी अधिकारी की अनुपस्थिति भी लोगों के आक्रोश का कारण बनी। इस अवसर पर अंकिता वर्मा, शरबती देवी, किशोर दुल्हेपुरा, हंसराज वर्मा समेत सैकड़ों लोग उपस्थित रहे, जिन्होंने अपनी समस्याओं को उठाने का प्रयास किया। यह जनसुनवाई स्थानीय प्रशासन के लिए एक अहम मौका थी, जिसमें लोगों के मुद्दों को सुनना और उनका समाधान करना आवश्यक है।









