डॉ. बामनिया की धमाकेदार वापसी: खंडपीठ ने फैसला पलटा, CMHO पद संभाला!

उदयपुर में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। डॉ. शंकरलाल बामनिया ने आज पुनः उदयपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) के पद पर कार्यभार संभाल लिया है। यह निर्णय जोधपुर में हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में लिया गया है। खंडपीठ ने डॉ. बामनिया की अपील पर फैसला सुनाते हुए उन्हीं को उदयपुर में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के रूप में काम करने का आदेश दिया।

इससे पहले, डॉ. बामनिया का ट्रांसफर जनवरी महीने में प्रतापगढ़ के जिला अस्पताल में उप नियंत्रक के पद पर कर दिया गया था, जो उन्हें दंडित करने का एक आदेश माना गया। इस ट्रांसफर के खिलाफ डॉ. बामनिया ने जोधपुर हाईकोर्ट की एकल पीठ में याचिका दायर की थी। हालांकि, एकल पीठ ने 2008 के संशोधित नियमों के आधार पर उनकी अपील को खारिज कर दिया। डॉ. बामनिया ने इस निर्णय के खिलाफ एक विशेष अपील दायर की, जिसमें उनके अधिवक्ता बी एस संधु ने उन शिकायतों को संदिग्ध बताया, जिनके आधार पर उनका ट्रांसफर किया गया था।

खंडपीठ में सुनवाई के दौरान डॉ. बामनिया ने अपनी बात रखते हुए कहा कि उनका ट्रांसफर जनहित या प्रशासनिक कारणों से नहीं, बल्कि झूठी और मनगढ़ंत शिकायतों के कारण किया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित जांच कमेटी ने सभी शिकायतों को मिथ्या पाया था और उस रिपोर्ट को निदेशालय में प्रस्तुत किया जा चुका था। इसके बावजूद एकल पीठ ने उनके मामले की गंभीरता को नहीं समझा था।

खंडपीठ ने डॉ. बामनिया की याचिका पर सुनवाई के दौरान गहरी रुचि दिखाई और सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद जेठ 2008 के नियमों के तहत फाइल की गई एफिडेविट को रद्द कर दिया। इसके साथ ही, अदालत ने एएजी को न केवल सख्त दिशा-निर्देश दिए बल्कि झूठी एफिडेविट पर लिखित माफी भी मांगी। खंडपीठ ने अपने निर्णय को सुरक्षित रखते हुए डॉ. बामनिया को फिर से सीएमएचओ पद पर बहाल किया और उन्हें जिम्मेदारी संभालने का स्पष्ट निर्देश दिया।

यही कारण है कि शुक्रवार को डॉ. बामनिया ने विधिवत रूप से सीएमएचओ पद पर कार्यभार ग्रहण कर लिया। उनके इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि न्यायालय ने न केवल उनके ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया बल्कि उनके अधिकारों की रक्षा के लिए उचित निर्णय भी लिया। इस प्रकरण से यह संदेश भी मिलता है कि प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता और उचित प्रक्रिया का पालन होना चाहिए।