केंद्र सरकार से किसानों की चंडीगढ़ में भव्य बैठक, डल्लेवाल की आज बड़ी घोषणा!
केंद्र सरकार और आंदोलनरत किसानों के बीच छठी मीटिंग 22 फरवरी को चंडीगढ़ में शाम 6 बजे निर्धारित की गई है। इस संबंध में केंद्र सरकार ने आधिकारिक पत्र भी जारी किया है। वहीं, किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का खनौरी बॉर्डर पर आमरण अनशन 87वें दिन में प्रवेश कर गया है। साथ ही, 21 फरवरी को किसान समुदाय शुभकरण सिंह की पहली बरसी मनाएगा, जिन्होंने इस आंदोलन में अपनी जान खो दी थी। इस अवसर पर शुभकरण के गांव बल्लो (बठिंडा) और तीनों सीमाओं पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
20 फरवरी को किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल मीडिया को संबोधित करेंगे, जिसमें वे कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएँ करने की योजना बना रहे हैं। इस क्षेत्र में किसानों के मुद्दों को लेकर उनका दृष्टिकोण बुनियादी महत्व का है। वहीं, किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा का 12 फरवरी को हार्ट अटैक आया था, जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए राजिंदरा अस्पताल पटियाला में भर्ती कराया गया था। उनकी हालत गंभीर होने के कारण अमृतसर में उनका सफल ऑपरेशन किया गया है। अभी वे आईसीयू में हैं।
इसके अतिरिक्त, 14 फरवरी को मीटिंग के लिए जाते समय किसान नेता कुरबुरु शांताकुमार का वाहन पटियाला के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हुए। उन्हें एयर एंबुलेंस के जरिए बेंगलुरु शिफ्ट किया गया, जहाँ उनका स्पाइनल कॉर्ड से संबंधित ऑपरेशन किया गया। जैसे-जैसे मीटिंग की तारीख नजदीक आ रही है, किसान शुभकरण की बरसी से पहले सिरसा से बल्लो गांव की ओर पैदल मार्च करने की योजना बना रहे हैं।
किसान नेताओं ने यह भी तय किया है कि वे केंद्र सरकार से मीटिंग से पहले लोगों से एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर सुझाव लेने का काम करेंगे। किसान अपने सुझाव खनौरी, शंभू या रत्नपुरा मोर्चे पर जाकर दे सकते हैं। इसके अतिरिक्त, सुझाव देने के लिए kohaabhimanyu@gmail.com पर ईमेल भी कर सकते हैं।
अंत में, 27 फरवरी को शंभू और खनौरी मोर्चों की संयुक्त किसान मोर्चे से एकता के प्रस्ताव पर बैठक आयोजित करने की योजना है। इस बैठक के लिए SKM (संयुक्त किसान मोर्चा) को आमंत्रण भेजा गया है। हाल ही में 12 फरवरी को SKM और किसान मजदूर मोर्चा की एक बैठक हुई थी, जिसमें गैर-राजनीतिक SKM के नेता शामिल नहीं हो सके थे, क्योंकि उस दिन खनौरी बॉर्डर पर किसानों की महापंचायत का आयोजन था। इस प्रकार, विभिन्न गतिविधियों और कार्यक्रमों के माध्यम से किसान नेता आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय हैं।









