साइबर क्राइम पर हाईकोर्ट का पंजाब सरकार से जवाब तलब: एफआईआर रहित शिकायतें भी शामिल!

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को साइबर अपराध से संबंधित शिकायतों पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति महाबीर सिंह सिंधु ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि अब तक कितनी शिकायतों पर कार्रवाई की गई है और जिन मामलों में प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई, उनके साथ क्या कदम उठाए गए हैं। इस मामले में एक पूर्व अधिकारी शामिल हैं जो पंजाब स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत थे और जिन्हें एक साइबर धोखाधड़ी का सामना करना पड़ा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि उसे ‘सीक्रेट एस्केप्स’ नामक टेलीग्राम समूह के माध्यम से धोखाधड़ी का शिकार बनाया गया, जहां स्कैमर्स ने उसे भारी निवेश करने के लिए झूठे लाभ का लालच दिया।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि उन्होंने साइबर पुलिस को कई बार शिकायत दी है और उनके पास आवश्यक सबूत भी हैं, जिनमें बैंक लेनदेन की जानकारी और धोखाधड़ी करने वाले व्यक्तियों का विवरण शामिल है। हालांकि, इसके बावजूद कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई और न ही जांच शुरू हुई। याचिका में नए नियमों का भी उल्लेख किया गया है जो कहते हैं कि किसी भी स्थान से शिकायत दर्ज की जा सकती है, यहां तक कि व्हाट्सएप के माध्यम से भी, जिसे जीरो एफआईआर कहा जाता है। यदि 14 दिनों के भीतर मामले की जांच नहीं की जाती है या रिपोर्ट पेश नहीं की जाती है, तो पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

कोर्ट ने पिछली सुनवाई में यह भी जानने की कोशिश की थी कि 1 जनवरी 2023 से 31 दिसंबर 2024 के बीच कितनी साइबर अपराध की शिकायतें दर्ज की गईं और उनमें से कितनी अभी भी लंबित हैं। अब मामला 17 फरवरी 2025 को फिर से सुना जाएगा। यह कदम उन पीड़ितों के लिए महत्वपूर्ण है जो साइबर ठगी के शिकार हुए हैं और न्याय की उम्मीद कर रहे हैं। पंजाब सरकार का यह जवाबदेही निश्चित रूप से साइबर अपराध के खिलाफ लड़ाई को मजबूत बनाने में सहायक साबित होगा और साथ ही इससे आम जनता में विश्वास भी बनेगा कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा।

साइबर अपराधों की बढ़ती संख्या के बीच यह निर्णय बेहद महत्वपूर्ण है। अब तक, कई मामलों में शिकायतकर्ताओं को समस्या का समाधान करने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा है, जिस कारण उनके लिए न्याय की प्रत्याशा में मानसिक तनाव उत्पन्न हुआ है। केंद्र सरकार और राज्य सरकारें निरंतर इस दिशा में प्रयासरत हैं कि साइबर सुरक्षा को मजबूत किया जाए, ताकि नागरिकों को सुरक्षित रखा जा सके। कोर्ट के इस आदेश से उम्मीद लगाई जा रही है कि निश्चित समय के भीतर पीड़ितों को उनकी समस्याओं का समाधान मिल सकेगा और पुलिस तंत्र में और अधिक प्रभावी बदलाव आएंगे।

इस मामले में आने वाली सुनवाई को लेकर अब सभी की निगाहें इस पर हैं कि पंजाब सरकार अपने कार्य से यह साबित करेगी कि वह साइबर अपराध के खिलाफ गंभीर है और न्यायालय में पेश होने के लिए एक ठोस रिपोर्ट तैयार करेगी।