राम रहीम का दावा- T-20 की शुरुआत मैंने की, बड़े खिलाड़ी चौंक उठे!
डेरा सच्चा सौदा के मुखी राम रहीम ने अपने हाल के ऑनलाइन सत्संग में कई विवादास्पद और चौंकाने वाले बयान दिए हैं। उन्होंने घोषणा की कि टी-20 क्रिकेट मैचों का प्रारंभ उन्होंने ही किया था और यह भी बताया कि उन्होंने 1990 में इस प्रारूप का परिचय दिया था। राम रहीम ने उल्लेख किया कि उस समय खिलाड़ियों का कहना था कि यह क्रिकेट नहीं है, बल्कि कोई अन्य खेल है। अब जब टी-20 पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो चुका है, यह भाषा उनके लिए एक उपहास का विषय बन गई है। लॉकडाउन के दौरान राम रहीम ने ये बातें अपने श्रद्धालुओं के साथ साझा की जो कि उनके अनुगामियों के लिए खिलौने की तरह पुनः जीवित हो गई हैं।
इसके अलावा, राम रहीम ने सांप पकड़ने वाले कैचर का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह श्रमशक्ति कार्य में आने वाली एक बहुत उपयोगी चीज है, जिसका उन्होंने 1994 में आविष्कार किया था। उनका कहना है कि जब सिरसा में शाह मस्ताना जी धाम का निर्माण हो रहा था, तब यहां से कोबरा निकल रहे थे और इसलिए यह आवश्यकता महसूस हुई। उनका दावा है कि इस कैचर की मदद से सांप को बिना चोट पहुंचाए सुरक्षित तरीके से पकड़ने में मदद मिलती है।
राम रहीम ने यह भी कहा कि उनका स्टैमिना अब पहले जैसा नहीं रहा। वे पहले 4-4 घंटे सत्संग में व्यतीत करते थे, पर अब समय की कमी के कारण उन्हें शॉर्टकट लेना पड़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि आजकल के लोग टेस्ट क्रिकेट से टी-20 की ओर बढ़ रहे हैं और जल्द ही टी-10 पर जाने की संभावना है। उनका तात्पर्य था कि लोग अब जल्दी जानकारी चाहते हैं और लंबे समय तक नहीं बैठना चाहते।
इसी दौरान, राम रहीम ने डिजिटल अरेस्ट का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक व्यक्ति को कैद कर देती है और इससे बचने के लिए लोगों को अपनी स्मार्टफोन की आदतों पर नियंत्रण रखना चाहिए। उनका कहना है कि कई बार लोग अपनी डिजिटल गतिविधियों से इतने प्रभावित होते हैं कि वे असली जीवन से कट जाते हैं और इस डर के कारण परेशान रहते हैं।
युवाओं को सलाह देते हुए, राम रहीम ने बताया कि हमें अपने परंपरागत आहार पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने जलवायु और स्वास्थ्य लाभ के लिए मोटे अनाज और कच्चे खाद्य पदार्थों के बारे में भी बातें की। इस संदर्भ में, उन्होंने अपने पूर्वजों के खान-पान की भी प्रशंसा की, जो उन्होंने आज के समय से अधिक संतुलित और स्वास्थ्यवर्धक बताया।
राम रहीम का यह सत्संग चौंकाने वाले बयानों और तर्कों से भरा हुआ था, और उनके अनुयायियों के लिए यह एक आकर्षक विषय बन गया। ऐसे कथन हमेशा विवादास्पद होते हैं और इनमें सामाजिक और सांस्कृतिक विभिन्नताओं की परछाई दिखाई देती है।









