पटियाला में कोर्ट कर्मियों पर हमला: मकान छुड़ाने गई टीम पर आग से जलाने की कोशिश!
पंजाब के पटियाला में एक गंभीर घटना का सामना तब हुआ जब जिला जज के आदेश पर किराए का मकान खाली कराने आए कर्मचारियों पर प्रहार कर दिया गया। कर्मचारियों पर आग लगाने का प्रयास किया गया, जिसमें स्प्रिट का उपयोग हुआ। घटना के दौरान आरोपियों ने कर्मचारियों पर माचिस फेंकी और उन्हें ईंट-पत्थरों से भी हमला किया। इस अप्रत्याशित हमले के बावजूद, कर्मचारी अपनी जान बचाने में सफल रहे। यह हमले उस समय हुए जब आरोपी किराए के मकान को खाली करने से इनकार कर रहे थे।
पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए सोमनाथ नामक कर्मचारी की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की है। मामला थाना कोतवाली अंतर्गत है, जहाँ पुलिस ने पटियाला के नामदार खां रोड पर रहने वाले राकेश कुमार, गीतू, मुकेश, संतोष कुमार, सचिन कुमार, सीमा और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह कोर्ट का आदेश था कि आरोपी किराए का मकान खाली करें, जिसकी अनदेखी करते हुए उन्होंने इस तरह की आपराधिक घटना को अंजाम दिया।
किराएदारों ने घर के मालिक की लगातार मांगों के बावजूद मकान खाली नहीं किया, जिसके कारण मकान मालिक ने न्यायालय में मामला दायर किया था। जज गुरकिरण सिंह की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए मकान को खाली कराने और कब्जा लेने के लिए आदेश जारी किया था। इसके बाद जब अंतरपाल सिंह, गंगा दत्ता, बलजीत सिंह और सोमनाथ शिकायत निवारण के लिए मकान पहुँचे, तो आरोपीगण ने उनके साथ धक्का-मुक्की की।
घटना के दौरान गुस्साए आरोपियों ने कर्मचारियों पर स्प्रिट फेंक दी। इस स्प्रिट ने सबसे पहले अंतरपाल सिंह और गंगा दत्ता को निशाना बनाया, जिसके बाद आरोपियों ने आग लगाने की कोशिश की। लेकिन किस्मत से, कर्मचारियों ने अपनी जान बचाने में सफलता पाई और वे वहां से भागने में सफल रहे। पुलिस की ताकतवर टीम ने घटना के सिलसिले में दो लोगों को हिरासत में लिया है, जबकि बाकी आरोपियों की तलाश के लिए ऑपरेशन जारी है।
यह घटना महज एक सामान्य किराए के विवाद से शुरू हुई, जो एक हिंसक टकराव में बदल गई। इसने समाज में कानून और व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मामले की गहराई से जांच करने का आश्वासन दिया है और सभी दोषियों को सज़ा दिलाने का संकल्प लिया है। यह मामला न केवल पटियाला में, बल्कि पूरे पंजाब में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि यह दिखाता है कि कैसे किराए के विवादों को राजनीतिक और कानूनी प्रक्रियाओं द्वारा निपटने के बजाय हिंसा का रूप ले लेता है।









