मुक्तसर में 120 रोडवेज बसें ठप, कर्मचारियों की 3 दिन की हड़ताल शुरू!

पंजाब के मुक्तसर जिले में रोडवेज कर्मचारियों द्वारा बसों की हड़ताल का ऐलान किया गया है। यह हड़ताल 3 दिनों तक चलेगी, जिसके दौरान पंजाब रोडवेज की सरकारी बसों का संचालन बिल्कुल ठप रहेगा। जानकारी के अनुसार, पनबस की 104 बसों की सेवाएं भी रोकी गई हैं, जबकि रोडवेज की केवल 16 बसें ही इस दौरान चल रही हैं। सोमवार को यूनियन के कर्मचारियों ने बसों की हड़ताल के साथ-साथ सरकार के खिलाफ धरना भी दिया। इस स्थिति के कारण बस स्टैंड पर केवल निजी बसों का संचालन हो रहा है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्राइवेट बसों की कमी के कारण लोकल बसों के रूट बहुत सीमित हो गए हैं, जिससे यात्रियों को देरी का सामना करना पड़ रहा है।

गुरप्रीत सिंह ढिल्लों, जो पंजाब रोडवेज पनबस/पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर यूनियन के सदस्य हैं, ने बताया कि यह हड़ताल 6 जनवरी से शुरू होकर 8 जनवरी तक जारी रहेगी। इसके अलावा, 7 जनवरी को सुबह 10 बजे चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री आवास के बाहर एक बड़े प्रदर्शन का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी के कर्मचारी पिछले काफी समय से अपनी जायज मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही है।

उनके अनुसार, पिछले साल 1 जुलाई को पंजाब रोडवेज, पीआरटीसी और पनबस के कर्मचारियों की एक बैठक पंजाब सरकार के अधिकारियों के साथ हुई थी। इस बैठक में कर्मचारियों ने अपनी प्रमुख मांगों को दोहराया था, जिसमें अस्थाई कर्मचारियों को स्थाई करने, ठेका प्रथा का अंत करने, विभाग में नई बसों की व्यवस्था लागू करने, ट्रांसपोर्ट माफिया पर रोक लगाने, शर्तों के आधार पर निकाले गए कर्मचारियों की बहाली और विभाग के उचित संचालन तथा वेतन वृद्धि की मांग शामिल थी।

यह हड़ताल इस बात का संकेत देती है कि रोडवेज कर्मचारी अपनी श्रमिक अधिकारों को लेकर गंभीर हैं। सरकार के प्रति उनकी नाराजगी इस तथ्य से स्पष्ट होती है कि उन्हें अपनी मांगे पूरी होने की उम्मीद नहीं है। ऐसे में, अगर यह हड़ताल आगे बढ़ती है तो यात्रियों को परिवहन की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। रोडवेज कर्मचारी अपने हक के लिए सड़कों पर उतर आए हैं, और यह देखना होगा कि सरकार उनके इस जायज संघर्ष का समाधान कब तक करती है।

एक ओर जहां यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर यह हड़ताल उस संघर्ष का हिस्सा है, जो कि आर्थिक और सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। कर्मचारियों की इन मांगों का समर्थन स्थानीय लोगों के बीच भी फैला हुआ है, और यदि उनका संघर्ष जारी रहता है, तो प्रशासन को इस पर गंभीरता से विचार करना होगा ताकि किसी भी तरह की अनावश्यक परेशानी से बचा जा सके।