मोहाली के स्कूलों में जल संकट: दूषित पानी में क्लोरोफॉर्म-बैक्टीरिया की भयंकर मौजूदगी खुली!
मोहाली जिले की स्टेट पब्लिक हेल्थ लैबोरेटरी द्वारा हाल ही में जारी की गई रिपोर्ट ने एक गंभीर चिंता का विषय उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, जिले के 9 सरकारी स्कूलों में से 5 स्कूलों में पीने के पानी में खतरनाक मात्रा में क्लोरोफॉर्म और बैक्टीरिया पाए गए हैं, जिससे यह पानी स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित हो गया है। केवल 4 स्कूलों का पानी ही पीने के लिए उपयुक्त पाया गया है। यह रिपोर्ट कंपोजिट नमूनों की जांच के बाद आई है, जो खरड़ स्थित लैब में भेजे गए थे। ऐसे में संबंधित अधिकारियों की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना बन गई है कि प्रभावित स्कूलों में पानी की गुणवत्ता में सुधार किया जाए।
जिला प्रशासन ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए सिविल सर्जन से निर्देश दिए हैं कि पानी की गुणवत्ता को तुरंत ठीक किया जाए। इसके लिए, पब्लिक हेल्थ विभाग ने शिक्षा विभाग से संपर्क किया है और स्कूलों में लगे आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) सिस्टम की जानकारी माँगी है। यह जानकारी एक गूगल फॉर्म के जरिए स्कूलों से एकत्रित की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पानी के उचित उपचार की प्रक्रिया चल रही है या नहीं। इसके साथ ही, जल की गुणवत्ता की पुनः जांच का भी आदेश दिया गया है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि छात्रों को सुरक्षित पानी मिल सके।
हालात की गंभीरता को देखते हुए, सिविल सर्जन दविंदर कुमार ने निर्देश दिए हैं कि जल की गुणवत्ता में सुधार को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने स्कूलों में नियमित क्लोरीनेशन और साफ-सफाई के अभियानों के आयोजन के लिए भी आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है।इससे पहले भी, जिले के 243 नमूनों में से 100 नमूने असुरक्षित पाए गए थे, जिसमें जुझार नगर, बड़ माजरा, बूथगढ़ और घडुआं जैसे कई ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल शामिल थे। यह एक बड़ा संकेत है कि सरकारी स्कूलों में जल स्वच्छता के मानकों में सुधार की जरूरत है।
इस स्थिति ने सभी संबंधित विभागों के लिए एक जागरूकता का विषय बना दिया है। चूंकि बच्चों का स्वास्थ्य सबसे अहम है, इस दिशा में तेजी से कदम उठाने की आवश्यकता है। शिक्षाप्रद निकाय और स्वास्थ्य एजेंसियों को मिलकर काम करने की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसे संकट से बचा जा सके। सरकारी स्कूलों में बच्चों को सुरक्षित और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है। यह मुद्दा न केवल स्वास्थ्य के लिहाज से, बल्कि बच्चों की शिक्षा, विकास और भविष्य के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।









