पटियाला: डल्लेवाल का अनशन दो महीने के करीब, 24 को SKM की बड़ी बैठक!
पंजाब के खनौरी और शंभू बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन के बीच आज (21 दिसंबर) को किसान संगठनों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन हुआ। इस बैठक का आयोजन पटियाला में किया गया, जहां ‘सामाजिक कार्यों के लिए किसान मोर्चा’ (एसकेएम) और ‘गैर राजनीतिक किसान मोर्चा’ (एसकेएम) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस बैठक में कोई निर्णायक फैसला नहीं लिया गया, लेकिन दोनों पक्षों ने इसे सकारात्मक बताया और मीटिंग के दौरान कई मुद्दों पर सहमति जताई गई। अगली बैठक 24 दिसंबर को निर्धारित की गई है। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने इस दौरान यह भी कहा कि जिस संघर्ष में वे जुटे हुए हैं, वह कुछ अलग प्रकार का है, और उनकी रणनीति को लेकर गंभीरता से चर्चा हुई।
बैठक के बीच, किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का मरणव्रत जारी है, जो अब 26वें दिन में प्रवेश कर गया है। उनकी स्वास्थ्य स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है, और अब वे किसी भी तरह की मुलाकात से बच रहे हैं। उनकी देखभाल के लिए डॉक्टरों की एक विशेषज्ञ टीम तैनात है, जो हर छह घंटे में उनकी सेहत की जांच करती है। प्रशासन ने उनके धरना स्थल के निकट चार कमरों का एक अस्थायी अस्पताल भी स्थापित किया है, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटा जा सके। इस दौरान एंबुलेंस भी हमेशा तैयार रखी गई है।
इससे पहले, डल्लेवाल की सेहत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में तीन दिन तक सुनवाई चली, जिसमें पंजाब सरकार ने उनकी स्वास्थ्य संबंधी सभी मेडिकल रिपोर्टे पेश कीं। न्यायालय ने स्पष्ट रूप से पंजाब सरकार की जिम्मेदारी निर्धारित की है कि यदि डल्लेवाल को किसी प्रकार की चिकित्सकीय सहायता की जरूरत पड़े, तो उसे तत्काल उपलब्ध कराया जाए। मामले की अगली सुनवाई 2 जनवरी को होगी, लेकिन अदालत ने सभी पक्षों को यह भी बताया है कि यदि किसी भी कारण से आवश्यकता पड़ती है तो वे अदालत से संपर्क कर सकते हैं।
आंदोलन के दौरान घायल हुए किसानों की हालात पर भी ध्यान दिया जा रहा है। आज सुबह किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने अन्य सीनियर किसानों के साथ अस्पताल जाकर घायल किसान नेता करनैल सिंह से मुलाकात की। करनैल सिंह घायल हो गए थे जब 8 दिसंबर को दिल्ली की ओर कूच करते समय हरियाणा पुलिस द्वारा छोड़े गए आंसू गैस के गोले की वजह से उन्हें चोटें आई थीं। इस प्रकार, पंजाब के विभिन्न किसान नेताओं की आपसी सहयोग और संवेदनशीलता आंदोलन को मजबूत बनाने का कार्य कर रही है।
किसान आंदोलन में यह घटनाएँ और प्रक्रियाएँ दर्शाती हैं कि समस्या के समाधान के लिए किसान नेता लगातार सक्रिय हैं और आगामी बैठकें इस दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। ऐसे में आंदोलन की दिशा और उसकी रणनीतियाँ भविष्य में क्या मोड़ लेंगी, यह देखना दिलचस्प होगा।









