फाजिल्का में कर्मचारियों का हल्लाबोल: पंचायतों की जल आपूर्ति की वापसी की मांग!
फाजिल्का में आज पीडब्ल्यूडी फील्ड एंड वर्कशॉप वर्कर्स यूनियन द्वारा एक प्रदर्शन आयोजित किया गया। यह प्रदर्शन फाजिल्का के डीसी दफ्तर के सामने आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में यूनियन से जुड़े कर्मचारी एकत्रित हुए। उनका मुख्य उद्देश्य पंचायतों को दी गई जल आपूर्ति सेवाओं को वापस लेना, लंबित डियरनेस अल्लोवेंस (डीए) जारी करना और कॉन्ट्रैक्ट पर कार्यरत कर्मचारियों को स्थायी करना था। प्रदर्शनकारियों ने इन मांगों को लेकर अपना गहरा रोष व्यक्त किया।
यूनियन के अध्यक्ष जय चंद ने इस मौके पर मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि उनके लंबित मुद्दों का समाधान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि उनका 11 प्रतिशत डीए लंबे समय से अटका हुआ है, जिसे अभी तक नहीं दिया गया है। इन समस्याओं के समाधान के लिए उन्हें उच्च स्तर पर ध्यान देने की आवश्यकता है। जय चंद ने आगे कहा कि जिन कॉन्ट्रैक्ट वर्करों ने 18 से 20 वर्ष तक सेवा दी है, उन्हें तुरंत स्थायी किया जाए। उनका मानना है कि जल आपूर्ति योजनाओं को पंचायतों में सौंपने का निर्णय गलत है, और इसे पीडब्ल्यूडी विभाग के अंतर्गत लाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से यह भी मांग की कि वेतन आयोग की रिपोर्ट को सुधारा जाए और उसे तुरंत लागू किया जाए। उनका यह भी कहना था कि पिछले कई वर्षों से उनकी परेशानियाँ बेवजह लंबित हैं, और यह स्थिति उनके कामकाज और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रही है। यूनियन सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि यदि उनकी मांगों को नहीं माना गया, तो वे आगामी पंजाब उप चुनावों में सरकार का विरोध करेंगे।
इसके अलावा, प्रदर्शनकारी 17 नवम्बर को गिद्दड़बाहा में एक बड़ी रैली करने की योजना बना रहे हैं। इस रैली में वे सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त करेंगे और अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाएंगे। इस रैली के जरिए वे सख्त संदेश देना चाहते हैं कि यदि उनकी जायज मांगे नहीं सुनवाई जाती हैं, तो वे निरंतर विरोध प्रदर्शन करते रहेंगे।
यूनियन के इस निर्णय से स्पष्ट है कि वे अपने अधिकारों के लिए हर संभव प्रयास करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। फाजिल्का में किए गए इस प्रदर्शन ने अन्य संगठनों को भी जागरूक किया है कि अपने वर्करों के अधिकारों के लिए उठ खड़े होने की आवश्यकता है। ऐसे आंदोलनों से न केवल स्थानीय प्रशासन को, बल्कि राज्य सरकार को भी उन मुद्दों को गंभीरता से लेने की मजबूरी होगी, जिनका लंबे समय से समाधान नहीं किया गया है।









