बरनाला में 11 को DC दफ्तर का घेराव, धान खरीद की मांग के लिए किसान उठाएंगे आवाज!

बरनाला में धान की खराब खरीद को लेकर किसानों में नाखुशी बढ़ती जा रही है। भारतीय किसान यूनियन उगराहां ने 11 नवंबर को डिप्टी कमिश्नर बरनाला के कार्यालय का घेराव करने का ऐलान किया है। संगठन के नेताओं ने गांवों की अनाज मंडियों में जाकर किसान समुदाय से धरने में शामिल होने की अपील की है। किसान नेता दर्शन सिंह और बिंदर पाल कौर ने इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि जिले में धान खरीद की प्रक्रिया अत्यंत खराब है। किसानों को फसल में अधिक नमी का बहाना बनाकर परेशान किया जा रहा है, जिसके चलते उन्हें अपने मेहनत की फसल को सही दाम नहीं मिल पा रहा है।

किसान नेताओं ने आरोप लगाया है कि धान की खरीददारी की जिम्मेदारी न सिर्फ राज्य सरकार की है, बल्कि डीसी बरनाला भी इसके लिए जवाबदेह हैं। किसानों का कहना है कि इस प्रतिकूल हालात के चलते उनकी फसल खरीदने में चुनौतियाँ बढ़ती जा रही हैं और नतीजा यह निकल रहा है कि उन्हें सरकार और प्रशासन की ओर से निराशा ही मिल रही है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि धान की पराली प्रबंधन का मुद्दा भी बुरा है और डीएपी खाद की उपलब्धता में भी कोई सुधार नहीं किया जा रहा है।

इसके अतिरिक्त, गांवों में पराली जलाने को लेकर शिक्षकों और मनरेगा के कर्मचारियों को निगरानी के लिए तैनात किया गया है, जो किसानों को और भी मानसिक तनाव में डाल रहा है। चीमा गांव की अनाज मंडी में खड़े किसान गुरमेल सिंह और बचित्र सिंह ने शिकायत करते हुए बताया कि उनकी धान की फसल मंडी में पिछले एक हफ्ते से पड़ी हुई है, लेकिन प्रशासन “अधिक नमी” का जिक्र करते हुए उनकी फसल खरीदने से मना कर रहा है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त की है और कहा है कि यह सब उनकी मेहनत की अनदेखी कर रहा है।

किसानों की इस दुर्दशा के चलते अब उनका धैर्य जवाब दे रहा है और वे सड़कों पर उतरने का मन बना चुके हैं। यदि सरकार इस मामले का जल्द समाधान नहीं करती है, तो यह आंदोलन और भी बड़ा रूप ले सकता है। किसान एकजुट होकर अपनी आवाज उठाने के लिए तैयार हैं और डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के घेराव के माध्यम से प्रशासन को अपनी समस्याओं से अवगत कराना चाहते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य है कि वे अपने हक की लड़ाई लड़ें और उचित दाम पर अपनी फसल को बिचौलियों से बचाते हुए सीधे सरकारी खरीद केंद्रों पर बिकवाने में सफल हों।

इस घटना से यह साफ है कि धान की खरीद में चल रही जटिलताएँ और किसानों की समस्याएँ अब एक गंभीर मुद्दा बन गई हैं, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस स्थिति के चलते उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार जल्द ही इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाएगी, ताकि किसानों की समस्याओं का समाधान हो सके और उन्हें उनकी मेहनत का उचित मुआवजा मिल सके।