बड़ी खबर: पंजाब PRTC को 400 बसें, 3500 ड्राइवर-कंडक्टरों की नौकरी पक्की, 600 परमिट रद्द!
पंजाब में परिवहन सेवाओं को सुधारने की दिशा में सरकार ठोस कदम उठाने जा रही है, जिससे सरकारी बसों में यात्रा करना आम लोगों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक बन सके। पंजाब रोडवेज ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (पीआरटीसी) के फ्लीट में लगभग 577 नई बसों को शामिल करने की योजना बनाई जा रही है। इसमें से 400 बसों के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, और उम्मीद जताई जा रही है कि आगामी जनवरी 2025 तक 200 नई बसें पीआरटीसी को मिल जाएंगी, जबकि शेष बसों को मई 2025 तक सड़कों पर उतारने की योजना है।
सरकार की यह पहल न केवल बसों की संख्या में वृद्धि करेगी, बल्कि इससे सरकारी बस सेवाओं को निजी बस ऑपरेटरों के समकक्ष लाने का भी प्रयास किया जा रहा है। मौजूदा समय में पीआरटीसी के पास लगभग 704 बसें हैं, जो इस विस्तार के बाद बढ़कर 1100 हो जाएंगी। रोजाना सरकार द्वारा 1.25 करोड़ रुपये की बस सेवा प्रदान की जाती है, और पिछले वित्तीय वर्षों की तुलना में 2023-24 में आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। हालांकि, इस दौरान महिलाओं को मुफ्त बस सेवा बंद करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है, जिससे राज्य के वित्तीय बोझ में वृद्धि हुई है।
सरकारी परिवहन सेवाओं को सुधारने के लिए हाल ही में लगभग 600 बसों के परमिट रद्द कर दिए गए थे, जिससे छोटे बस ऑपरेटरों पर प्रभाव पड़ा है। परिवहन मंत्री लाल जीत सिंह भुल्लर ने इस फैसले को उचित ठहराते हुए कहा कि कुछ नियमों की अनदेखी के कारण यह टेंडर प्रक्रिया चंद बड़े परिवारों तक सीमित हो गई है। इसके अलावा, इससे सरकार को वित्तीय घाटा भी हो रहा था। इस समस्या के समाधान के लिए निगरानी और समीक्षा का काम जारी रखने पर बल दिया गया है।
वहीं, पीआरटीसी के कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार को अल्टीमेटम दिया है। यदि 1 जुलाई 2024 को जालंधर में होने वाली बैठक में उनकी मांगे पूरी नहीं की जाती हैं, तो संघर्ष तेज करने की चेतावनी दी गई है। उनके द्वारा उठाई गई सात प्रमुख मांगों में स्थायी नौकरी का प्रावधान, ठेका प्रथा का अंत, समान काम के लिए समान वेतन, कर्मचारी विरोधी नियमों की समाप्ति, किलोमीटर स्कीम के तहत चल रही बसों का बंद होना, और ट्रांसपोर्ट माफिया के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने की मांग शामिल है।
इस प्रकार पंजाब सरकार की योजना न केवल बस सेवाओं को सुधारने की दिशा में अग्रसर है, बल्कि यह कर्मचारियों की भलाई और वित्तीय स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। अब समाज के विभिन्न वर्गों की जिम्मेदारी है कि वे इस परिवर्तन का समर्थन करें ताकि परिवहन सेवाएं और अधिक प्रभावशाली हो सकें।









