अबोहर के अस्पताल में डॉक्टर संकट: विशेषज्ञ पद खाली, मरीज हो रहे रेफर!
पंजाब के अबोहर में सरकारी अस्पताल की स्थिति दिनों-दिन बदतर होती जा रही है, जहां डॉक्टरों की कमी को लेकर कोई स्थायी समाधान नहीं निकल रहा है। आम आदमी पार्टी की सरकार पिछले ढाई साल से राज्य में शासन कर रही है, लेकिन अस्पताल में महत्वपूर्ण डॉक्टरों की नियुक्ति अभी तक नहीं हो पाई है। इसके चलते स्थानीय निवासियों को इलाज के लिए मजबूरन प्राइवेट डॉक्टरों का सहारा लेना पड़ रहा है। आम आदमी पार्टी के हलका इंचार्ज अरुण नारंग और विधायक संदीप जाखड़ का कहना है कि उन्होंने यह समस्या कई बार स्वास्थ्य मंत्री के सामने उठाई है, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन मिला है।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए, पिछले एक वर्ष से बाल रोग विशेषज्ञ का पद अभी भी खाली है, जिससे केवल अबोहर ही नहीं, बल्कि आस-पास के गांवों के लोग भी प्राइवेट क्लिनिक्स का रुख कर रहे हैं। डॉ. साहिब राम के पद छोड़ने के बाद से कोई चाइल्ड स्पेशलिस्ट नियुक्त नहीं किया गया है, जो बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी मामलों में स्थानीय लोगों की कठिनाइयों को बढ़ा रहा है। इसी तरह, गायनोलॉजी के क्षेत्र में भी कोई विशेषज्ञ नहीं है, जबकि हर महीने यहां 250 से 300 डिलीवरी होती हैं। गर्भवती महिलाएं मजबूरी में प्राइवेट डॉक्टरों से परामर्श लेने को मजबूर हैं, जिससे उनकी स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।
सरकारी अस्पताल में ब्लड बैंक और लेब इंचार्ज केवल गर्भवती महिलाओं का चेकअप कर रही हैं, लेकिन जब सिजेरियन या अन्य जटिल ऑपरेशनों की बात आती है, तो सही सुविधा उपलब्ध नहीं होती। नतीजतन, गर्भवती महिलाओं को रेफर कर दिया जाता है, जिससे अस्पताल की ओपीडी में काफी गिरावट आई है। इसके अलावा डेंटिस्ट के पद के खाली होने से भी उपचार प्रभावित हो रहा है। अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी अस्पताल में उपलब्ध नहीं है, और बाहर के प्राइवेट सेंटरों के साथ अनुबंध के बावजूद, उनके काम करने की प्रवृत्ति में कोई स्थिरता नहीं है।
एनेस्थीसिया विशेषज्ञ की कमी भी एक बड़ी समस्या है; सप्ताह में केवल दो दिन उनकी ड्यूटी होती है, जिससे सर्जरी और ऑर्थो की प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं। यदि इमरजेंसी में किसी मरीज का ऑपरेशन करना हो, तो उन्हें दूसरे शहर में रेफर किया जा रहा है। इस स्थिति के कारण एमडी डॉक्टरों को भी एमरजेंसी ड्यूटी करनी पड़ रही है, जो ओपीडी सेवा को बाधित कर रही है।
सिविल सर्जन चंद्रशेखर कक्कड़ ने इस संदर्भ में स्पष्ट किया कि वे अपनी ओर से हर संभव प्रयास कर रहे हैं, लेकिन डॉक्टरों की कमी को पूरा करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में लगातार सरकार से संवाद किया जा रहा है, ताकि अस्पताल में डॉक्टरों की व्यवस्था की जा सके। लेकिन अब तक किसी भी ठोस कार्रवाई की कमी से स्थानीय लोगों का स्वास्थ्य खतरे में है, जिसकी गंभीरता को समझते हुए जल्द से जल्द समाधान होना आवश्यक है।









