लुधियाना में पुलिस चौकी के बाहर खूनी संघर्ष, देखें दंगाईयों की हैरतअंगेज वारदात!
लुधियाना के थाना डिवीजन नंबर के अंतर्गत आने वाले सिविल अस्पताल में पिछले एक सप्ताह में हिंसा की घटना तीसरी बार हुई है। यह घटना रात करीब 10:45 बजे हुई, जब अस्पताल की पुलिस चौकी के बाहर दो दलों के बीच जबरदस्त मारपीट शुरू हो गई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर धारदार हथियारों और ईंटों से हमले किए। इस आपसी झगड़े के दौरान पुलिस चौकी के अंदर मौजूद अधिकारी बाहर नहीं आए, जबकि वहां का शोर सुनाई दे रहा था। जब मामले ने गंभीर रूप ले लिया, तो इमरजेंसी में तैनात दो पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और स्थिति का निरीक्षण किया। अस्पताल में हुई इस घटना ने पुलिस की निष्क्रियता को उजागर कर दिया है, जिसे सामुदायिक सुरक्षा के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।
यहां तक कि एक व्यक्ति को ईंट लगने के कारण गंभीर चोटें आईं, और उसे तुरंत डॉक्टरों द्वारा सीएमसी अस्पताल के लिए रेफर किया गया। घायल व्यक्ति इफ्तकार ने बताया कि वह गुरमेल पार्क के पास निवास करता है। घटना का कारण पड़ोसी पिता-पुत्र का अचानक किया गया हमला था। आरोपी ने मदन नामक व्यक्ति को गली में पीट दिया और जब मदन का सिर फट गया, तो उसका मित्र मोहम्मद शानू उसे मेडिकल चेकअप के लिए अस्पताल लेकर गया। लेकिन यहां भी हमलावर पिता-पुत्र पहुंच गए और ईंटें फेंकना शुरू कर दिया। इस हमले में शानू का माथा भी फट गया, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, और फिर सीएमसी रेफर किया गया। शानू ने बताया कि वह एक पक्ष का था और जब दूसरे पक्ष ने हमला किया, तो वह अस्पताल में मौजूद था।
सिविल अस्पताल में पिछली कुछ घटनाएं और भी भयावह रही हैं। लगभग 5 दिन पहले, एक अन्य घटना में, दो दलों के बीच आपसी झगड़ा हो गया था, जिसमें दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के सिर पर पगड़ी भी फेंकी थी। इससे पहले भी 23 अक्टूबर की रात को शेरपुर चौक के पास टैक्सी चालकों के बीच हुई झड़प ने अस्पताल में माहौल को खराब कर दिया था। इस संघर्ष के दौरान कई लोग घायल हुए और अस्पताल के बाहर ईंट-पत्थर फेंके गए। यह घटनाएं उस समय हुईं जब लोग अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे थे। इन लगातार बढ़ती घटनाओं को लेकर पुलिस प्रशासन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा सका है।
सिविल अस्पताल की ये घटनाएं अब स्थानीय समुदाय के बीच चिंता का कारण बन गई हैं। विशेष रूप से, अस्पताल के अंदर और बाहर की सुरक्षा व्यवस्था के संदर्भ में सवाल उठने लगे हैं। जबकि अस्पताल में जरूरतमंद रोगियों का आना-जाना जारी रहता है, घटना की पुनरावृत्ति ने लोगों के बीच असुरक्षा का माहौल बना दिया है। ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशासन को इस दिशा में प्रभावी कार्रवाई करने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके और अस्पताल को एक सुरक्षित स्थान बनाया जा सके।









