training-on-natural-and-organic-farming-practices

प्राकृतिक खेती से घटेगी लागत और सुधरेगा मिट्टी का स्वास्थ्य

जगदलपुर, 19 अगस्त । शहीद गुण्डाधुर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र के ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (रावे) कार्यक्रम के अंतर्गत ग्राम कुम्हरावंड में प्राकृतिक एवं जैविक कृषि पद्धतियों पर एक प्रभावी जागरूकता सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. आरएस. नेताम के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को स्थानीय संसाधनों के समुचित उपयोग से खेती की लागत घटाने और पर्यावरण-अनुकूल टिकाऊ पद्धतियों से जोड़ना था।

कार्यक्रम के दौरान रावे विद्यार्थियों और कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों एवं ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता के बीच ड्रम में जीवामृत तैयार करने का सजीव प्रदर्शन किया। इस अवसर पर उपस्थित मृदा वैज्ञानिक डॉ. थानेश्वर देवांगन ने मिट्टी के स्वास्थ्य और दीर्घकालिक उर्वरता को बनाए रखने के लिए प्राकृतिक खेती को समय की अनिवार्य आवश्यकता बताया। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. जीवन लाल सलाम ने स्पष्ट किया कि गोबर, गोमूत्र, बेसन और गुड़ के मिश्रण से बनने वाला जीवामृत मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीवों की सक्रियता को तेजी से बढ़ाता है। इसके साथ ही डॉ. नीता मिश्रा ने खेतों में जीवामृत के सही प्रयोग और छिड़काव की विधियों की तकनीकी जानकारी साझा की।

प्रशिक्षण सत्र में विद्यार्थियों ने बीजों के प्राकृतिक शोधन के लिए बीजामृत तैयार करने की विधि समझाई, वहीं रासायनिक कीटनाशकों के विकल्प के तौर पर अग्न्यास्त्र एवं ब्रह्मास्त्र जैसे प्रभावी जैविक कीट नियंत्रक बनाने की प्रक्रिया से भी किसानों को अवगत कराया। इस आयोजन में महाविद्यालय की डॉ. चेतना खांडेकर, डॉ. खुशबू टंडन सहित बड़ी संख्या में गौपालक और स्थानीय किसान उपस्थित रहे, जिन्होंने उत्साहपूर्वक इन प्राकृतिक तकनीकों को सीखकर अपने खेतों में अपनाने का संकल्प लिया।