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बिना विधायक बने दोबारा मंत्री बनाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बिहार सरकार से मांगा जवाब

नई दिल्ली, 30 जुलाई । सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में बिना विधायक या विधान पार्षद बने दूसरी बार मंत्री बनाए गए दीपक प्रकाश की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सख्ती बरती है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि राज्य सरकार को बताना होगा कि कोई व्यक्ति बिना विधायक या विधान पार्षद बने छह महीने से ज्यादा समय तक मंत्री कैसे रह सकता है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर 4 अगस्त को सुनवाई करेगा।

याचिका पर कोर्ट ने 15 जून को मंत्री दीपक प्रकाश और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को नोटिस जारी किया था। याचिका राकेश कुमार सिंह ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि दीपक प्रकाश को पहली बार 10 नवंबर 2025 को नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के दौरान बिना विधायक या विधान पार्षद बने ही मंत्री बनाया गया था। याचिका में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत कोई व्यक्ति विधायक या विधान पार्षद बने अधिकतम छह महीने तक मंत्री रह सकता है। इस प्रावधान के बाद दीपक प्रकाश 19 मई तक रह सकते थे। नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सम्राट चौधरी ने 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। सम्राट चौधरी ने 7 मई को जब अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया तो दीपक प्रकाश को फिर बिना विधायक या पार्षद बने दोबारा मंत्री बना दिया गया। लेकिन 19 मई के बाद दीपक प्रकाश का मंत्री पद पर बने रहना गैरकानूनी है।