पूर्वी सिंहभूम के नारदा गांव में संदिग्ध मलेरिया से 12 वर्षीय बच्ची की मौत, भाई ब्रेन मलेरिया से संक्रमित
पूर्वी सिंहभूम, 16 जुलाई । पूर्वी सिंहभूम जिले के ग्रामीण इलाकों में मलेरिया का बढ़ता प्रकोप चिंता का विषय बनता जा रहा है। पोटका प्रखंड के कोवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत नारदा पंचायत के नारदा गांव में तेज बुखार से पीड़ित 12 वर्षीय बच्ची की मौत हो गई, जबकि उसका पांच वर्षीय भाई ब्रेन मलेरिया (सेरेब्रल मलेरिया) से संक्रमित पाया गया है। गंभीर हालत में बच्चे को एमजीएम अस्पताल, जमशेदपुर में भर्ती कराया गया है, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार जारी है।
मृत बच्ची की पहचान नारदा गांव निवासी कोंदा सरदार की 12 वर्षीय पुत्री अनीता सरदार के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, अनीता पिछले कई दिनों से तेज बुखार से पीड़ित थी। परिवार ने शुरुआती दिनों में बीमारी को सामान्य बुखार अथवा पीलिया समझकर घरेलू उपचार और पारंपरिक उपायों का सहारा लिया। अस्पताल ले जाने में हुई देरी के कारण उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई और अंततः उसकी मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग ने मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि के लिए रक्त का नमूना जांच के लिए भेज दिया है।
घटना की सूचना मिलते ही गुरुवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पोटका के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुकांत सीट स्वास्थ्यकर्मियों की टीम के साथ नारदा गांव पहुंचे। टीम ने मृत बच्ची के घर पहुंचकर परिवार के अन्य सदस्यों की स्वास्थ्य जांच की। जांच के दौरान पता चला कि मृतका का पांच वर्षीय भाई अजय सरदार भी कई दिनों से तेज बुखार से पीड़ित है और उसकी हालत लगातार बिगड़ रही है।
स्वास्थ्यकर्मियों ने पाया कि बच्चे की स्थिति गंभीर होने के बावजूद परिजन उसे अस्पताल ले जाने के लिए तैयार नहीं थे। काफी समझाइश और प्रयास के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम बच्चे को सीएचसी पोटका लेकर पहुंची, जहां तत्काल उसकी जांच और उपचार शुरू किया गया।
सीएचसी पोटका में की गई जांच में अजय सरदार ब्रेन मलेरिया (सेरेब्रल मलेरिया) से संक्रमित पाया गया। चिकित्सकों ने बताया कि उसके शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर भी काफी कम है, जिससे उसकी स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए एमजीएम अस्पताल, जमशेदपुर रेफर कर दिया गया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार बच्चे की हालत अभी भी चिंताजनक बनी हुई है और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उसका इलाज जारी है।
स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि बच्ची की बीमारी की जानकारी न तो गांव की सहिया को दी गई थी और न ही स्वास्थ्य विभाग को इसकी कोई सूचना मिली थी। मृतका के पिता मूक-बधिर हैं, जबकि परिवार के अन्य सदस्य बीमारी को लेकर भ्रमित रहे। इसी कारण समय रहते मलेरिया की जांच नहीं हो सकी और आवश्यक उपचार शुरू नहीं किया जा सका।
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि मलेरिया का समय पर परीक्षण और उपचार होने पर अधिकांश मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि लगातार बुखार आने पर बिना देर किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं और किसी भी प्रकार के अंधविश्वास या घरेलू उपचार पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लें।
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने नारदा गांव में विशेष स्वास्थ्य अभियान शुरू कर दिया है। स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर बुखार से पीड़ित लोगों की पहचान कर रहे हैं, रक्त के नमूने लेकर मलेरिया की जांच की जा रही है तथा जरूरतमंद मरीजों को तत्काल दवा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही ग्रामीणों को मलेरिया के लक्षण, बचाव के उपाय, मच्छरों से सुरक्षा तथा समय पर इलाज कराने के महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि बुखार को हल्के में न लें, मच्छरदानी का नियमित उपयोग करें, घरों के आसपास जलजमाव न होने दें तथा किसी भी व्यक्ति में तेज बुखार, कंपकंपी या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत सरकारी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें, ताकि गंभीर स्थिति बनने से पहले ही प्रभावी उपचार सुनिश्चित किया जा सके।———-









