डीएमके ने करूर भगदड़ मामले में दिल्ली हाई कोर्ट से अपनी याचिका वापस ली
नई दिल्ली, 07 जुलाई । तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) प्रमुख और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की 2025 में रैली के दौरान करूर में हुई भगदड़ केस में गवाहों को प्रभावित करने के मामले में दायर याचिका द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम (डीएमके) ने उच्चतम न्यायालय से वापस ले ली है। जस्टिस केवी विश्वनाथन की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि वो राजनीतिक लड़ाई में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती। राजनीतिक लड़ाई कोर्ट रुम से बाहर ही होनी चाहिए।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता और डीएमके नेता आरएस भारती से कहा कि वो राजनीतिक लड़ाई में नहीं पड़ना चाहता है। कोर्ट ने कहा कि किसी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी को मामले में हस्तक्षेपकर्ता कैसे बनाया जा सकता है। क्या डीएमके मुख्यमंत्री के करुर यात्रा को रेगुलेट करना चाहती है। डीएमके नेता आरएस भारती ने याचिका दायर कर कहा था कि उच्चतम न्यायालय ने 13 अक्टूबर 2025 को करुर भगदड़ की सीबीआई जांच का आदेश दिया था। अब इस मामले के कुछ आरोपित गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। ये आरोपित वर्तमान राज्य सरकार में मंत्री हैं।
विजय की रैली के दौरान 27 सितंबर, 2025 को करुर में भगदड़ हो गई थी। उसके बाद 13 अक्टूबर, 2025 को उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई जांच की निगरानी के लिए उच्चतम न्यायालय के पूर्व जज जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित करने का भी आदेश दिया था। इस जांच समिति में तमिलनाडु कैडर के दो आईपीएस अधिकारी हैं, जो तमिलनाडु के मूल निवासी नहीं हैं।
हिन्दुस्थासमाचार/संजय









