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प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने खूंटी जेल का किया निरीक्षण

खूंटी, 30 जून । प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) के अध्यक्ष रसिकेश कुमार ने मंगलवार को खूंटी उप-कारा का औचक निरीक्षण कर बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और विधिक सहायता व्यवस्था की समीक्षा की। निरीक्षण का उद्देश्य बंदियों के कल्याण, स्वास्थ्य सुविधाओं तथा न्याय तक उनकी प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कारा प्रशासन की व्यवस्थाओं का आकलन करना था।

निरीक्षण के दौरान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सबसे पहले जेल रसोई का निरीक्षण किया और बंदियों को उपलब्ध कराए जा रहे भोजन की गुणवत्ता एवं स्वच्छता की जांच की। उन्होंने रसोई की व्यवस्था का अवलोकन करते हुए भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने और निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

इसके बाद उन्होंने जेल अस्पताल का निरीक्षण कर उपचार व्यवस्था और दवाइयों के स्टॉक का जायजा लिया। अस्पताल में आवश्यक दवाइयों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध मिलने पर उन्होंने संतोष व्यक्त किया। इस दौरान चिकित्सक डॉ. संजय कुजूर ने उन्हें अस्पताल में उपचाराधीन बंदियों तथा रिम्स, रांची में इलाजरत एक बंदी की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी दी।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कारा विधिक सहायता क्लिनिक (प्रिजन लीगल एड क्लिनिक) और मुलाकात विधिक सहायता हेल्प डेस्क का भी निरीक्षण किया। उन्होंने मुख्य विधिक सहायता प्रतिरक्षा परामर्शी (एलएडीसी) राजीव कमल को निर्देश दिया कि क्लिनिक और हेल्प डेस्क का नियमित एवं प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही सभी अभिलेखों को अद्यतन रखा जाए, ताकि बंदियों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण विधिक सहायता उपलब्ध हो सके।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने जेल प्रशासन को उप-कारा परिसर में स्थापित ई-कियोस्क को पूर्ण रूप से संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ई-कियोस्क के माध्यम से बंदी अपने मामलों की अद्यतन स्थिति, न्यायिक प्रक्रियाओं और अन्य आवश्यक जानकारियां आसानी से प्राप्त कर सकेंगे, जिससे उन्हें समय पर आवश्यक सूचना उपलब्ध होगी।

जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव एवं सिविल जज (वरीय प्रभार) कमलेश कुमार बेहरा ने बताया कि इस प्रकार के नियमित निरीक्षण का उद्देश्य बंदियों को प्रभावी विधिक सहायता उपलब्ध कराना, उनके स्वास्थ्य और कल्याण की निगरानी करना तथा न्याय तक उनकी पहुंच को और अधिक सुदृढ़ बनाना है। उन्होंने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार बंदियों के अधिकारों की सुरक्षा और उन्हें आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।———–