स्पीकर के अयोग्यता नोटिस विवाद में रिव्यू पिटिशन खारिज
जयपुर, 02 मई । राजस्थान उच्च न्यायालय ने पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट व उनके गुट के डेढ दर्जन तत्कालीन विधायकों को स्पीकर की ओर से अयोग्यता नोटिस देने के विवाद में दायर रिव्यू पिटिशन को खारिज कर दिया है। एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस शुभा मेहता की खंडपीठ ने यह आदेश मोहनलाल नामा की रिव्यू पिटीशन खारिज करते हुए दिए। अदालत ने कहा कि जो मुद्दे उठाए गए थे, वे ऑर्डर ऑफ एडमिशन में दर्ज किए गए थे और अब वे केवल एकेडमिक ही रह गए हैं। ऐसे में रिट याचिका को सारहीन घोषित कर निस्तारित किया गया था। इसके साथ ही अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट समय-समय पर तय कर चुका है कि अदालत का रिव्यू का दायरा अत्यंत सीमित होता है और रिव्यू के माध्यम से मामले के पुन: न्याय निर्णय की अनुमति नहीं दी जा सकती। ऐसे में रिव्यू याचिका को खारिज किया जाता है।
रिव्यू पिटिशन में अधिवक्ता विमल चौधरी ने अदालत को बताया कि 19 दिसंबर, 2023 को आदेश पारित करते समय उसे तर्क रखने का मौका नहीं दिया। इसके अलावा हाईकोर्ट ने पूर्व में सुनवाई करते हुए दल-बदल, व्हिप जारी करने का दायरा, स्पीकर की शक्तियां और न्यायिक समीक्षा सहित कुल 13 विधिक बिंदु तय किए थे। जिन्हें तय किए बिना ही याचिका को सारहीन बताकर निस्तारित कर दिया गया। इसके साथ ही विधायकों के इस्तीफे से जुड़े मामले में नेता प्रतिपक्ष रहे राजेन्द्र राठौड़ की याचिका पर भी हाईकोर्ट विधिक बिंदु पर सुनवाई कर रहा है, जबकि उस मामले में भी विवाद समाप्त हो चुका है। इसके अलावा स्पीकर के नोटिस की क्रियान्विति पर अंतरिम रोक लगाने वाले हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ स्पीकर ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी, जो अभी भी लंबित चल रही है। इसे देखते हुए भी 19 दिसंबर, 2023 के फैसले पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए और विधिक बिंदु को बिना सुलझाए नहीं छोडना चाहिए।
गौरतलब है कि साल 2020 में सचिन पायलट सहित करीब डेढ दर्जन विधायक मानेसर के एक रिसॉर्ट में चले गए थे। उन पर यह आरोप लगा कि उन्होंने मुख्यमंत्री की बगावत करते हुए यह कदम उठाया है। इसके बाद कांग्रेस के मुख्य सचेतक महेश जोशी ने स्पीकर से शिकायत की थी कि इन विधायकों ने पार्टी की ओर से जारी व्हिप की अवहेलना की है और 13 व 14 जुलाई, 2020 को जयपुर में आयोजित कांग्रेस विधायक दल की बैठक में शामिल नहीं हुए। इस पर स्पीकर ने इन विधायकों को 15 जुलाई 2020 को नोटिस जारी कर पूछा कि क्यों ना पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया जाए। इस पर उन्होंने इस नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।









