भगवान की भजन में शक्ति है : रामप्रताप शास्त्री
श्री शिव महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह जारी है।
तीन अगस्त को कथा के
तीसरे दिन कथावाचक आचार्य प्रवर रामप्रताप शास्त्री ”कोविद” श्रोताओं को
सृष्टि की रचना को लेकर कथा सुनाते हुए कहा कि वेद मंत्रों के श्रवण का
अर्थ समझना बहुत जरूरी है। भगवान की भजन में शक्ति है। अकाल मृत्यु बढ़ गई
है, भजन के प्रभाव को बढ़ाइए।
श्री नगर कालोनी रुद्री निवासी चेतन
सिन्हा एवं राजलक्ष्मी सिन्हा द्वारा एक अगस्त से आठ अगस्त तक श्री शिव
महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आयोजन किया गया है। जिसमें कथावाचक पुरी
पीठाधीश्वर श्रीमद जगतगुरू शंकराचार्य महाभाग के कृपा पात्र शिष्य गुरुदेव
आचार्य प्रवर रामप्रताप शास्त्री ”कोविद” अपने मुखारविंद से श्रोताओं को
शिव महापुराण कथा का रसपान करा रहे है। एक अगस्त को श्री दक्षिणमुखी
हनुमान मंदिर रुद्री चौक से कथा स्थल श्री नगर कालोनी तक भव्य कलश यात्रा
निकालकर कथा शुरू हुई। कथा स्थल में रोज सुबह साढ़े आठ बजे से 12 बजे तक
महाभिषेक पूजन किया जा रहा है। रविवार को कथा के तीसरे दिन सृष्टि के
निर्माण, अर्धनारीश्वर, भगवान शिव और ब्रह्मा के अवतार एवं कुबेर चरित्र को
लेकर कथा सुनाई गई। कथावाचक रामप्रताप सिंह शास्त्री ने कहा कि भगवान का
नाम जपने से शारीरिक और मानसिक कष्ट दूर हो जाते है। भगवान का नाम औषधि
नहीं, महा औषधि है। संसार में नाम से बड़ी कोई दूसरी औषधि नहीं है। भगवान
के भजन से अवस्था पर विजय पाने की क्षमता रखते है। ब्रह्मा के क्रोध से
भगवान रुद्र की उत्पति हुई। रुद्र भगवान शिव के अंश है। ब्रह्मा के गोद से
देवर्षि नारद प्रकट हुए। ब्रम्हा ने शीश झुकाकर महादेव से विनती की सृष्टि
की उत्पति कैसे करें। शीश उठाते ही भगवान शिव अर्धनारीश्वर के रूप में
प्रकट हुए। इसे देखकर सृष्टि के क्रम को बढ़ाने के लिए स्त्री और पुरुष की
उत्पति की प्रेरणा मिली। मनु और शतरूपा से सृष्टि की उत्पति हुई। आज चार
अगस्त को संध्या देवी कथा, सृष्टि निर्माण कथा, पांच को सती चरित्र, शिव
सती विवाह उत्सव, छह को पार्वती प्राकट्य उत्सव, शिव पार्वती विवाह
महोत्सव, सात को त्रिपुरासुर वध, तुलसी चरित्र, कार्तिकेय जन्म, गणेश
जन्मोत्सव, आठ को द्वादश ज्योतिर्लिंग महिमा, कथा निवेदन, गृह यज्ञ,
पूर्णाहुति एवं महाप्रसादी का वितरण किया जाएगा। इस अवसर पर फागूराम
सिन्हा, श्याम बाई सिन्हा, लाभांश सिन्हा, राधेश्याम, भारती, भूषण लाल,
नर्मदा, डेमन, हीरामणि, चित्ररेखा, नारायण लाल, अश्वनी, लीना, हिमांचल,
हेमा कटलहरे, मधु सिन्हा सहित सिन्हा परिवार के सदस्य, कालोनी के लोग एवं
स्वजन बड़ी संख्या में शामिल हुए।









