बलरामपुर : ऑपरेशन मुस्कान से जुड़े फिर अधूरे रिश्ते, खोए हुए बच्चों की हुई घर वापसी

पुलिस प्रशासन ने भाई की भूमिका निभाते हुए जिले के 19 गुमशुदा नाबालिग बच्चों को उनके परिवार से मिलवाया। ये वे मासूम थे जिनका बचपन कहीं भीड़ में खो गया था, कहीं मजबूरी में छूट गया था और कहीं शोषण की अंधेरी गलियों में गुम हो गया था। लेकिन रक्षाबंधन से ठीक पहले, ऑपरेशन मुस्कान के तहत उन्हें सुरक्षित घर वापस लाया गया।

पुलिस मुख्यालय रायपुर के निर्देश पर 1 जुलाई से 31 जुलाई तक जिले में चलाए गए इस अभियान में कुल 19 नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू किया गया, जिनमें 13 बच्चियां और छह बालक शामिल हैं। ये बच्चे न केवल छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से, बल्कि चेन्नई, महाराष्ट्र, तेलंगाना, दिल्ली जैसे दूरस्थ राज्यों से भी खोजे गए।

इस 1 महीने के अभियान में गहनता से जांच पड़ताल की गई। जिन बच्चों को लंबे अरसे से अपने परिवार से मिलने की उम्मीद नहीं थी उन बच्चों की पहचान की गई और पुलिसकर्मियों के समर्पण, कड़ी मेहनत और अथक प्रयास का परिणाम है कि ऑपरेशन मुस्कान के तहत गुमशुदा बच्चों को सुरक्षित व ससम्मान उनके परिजनों को सौंपा गया।

ग्राम पुरसवाडीह निवासी जो पेशे से एक साधारण किसान हैं, ने अपनी बेटी के मिलने वाले दिन को याद कर हुए भावुक स्वर में कहा कि, मैं गांव का एक किसान हूं। वे बताते हैं कि तमिलनाडु का नाम तो सुना था, पर कभी सोचा नहीं था कि मेरी बेटी वहाँ पहुँच जाएगी। जिस दिन वो बिना कुछ बताए घर से चली गई, जैसे हमारे जीवन का कोई बड़ा हिस्सा ही टूटकर अलग हो गया। कई दिन तक समझ नहीं आया क्या करें, कहाँ जाएँ। लेकिन पुलिस ने हमें सिर्फ आश्वासन नहीं दिया, भरोसा भी दिलाया और वो भरोसा निभाया। ऑपरेशन मुस्कान के ज़रिए मेरी बेटी को हजारों किलोमीटर दूर तमिलनाडु से खोजकर वापस लाया गया। जिस दिन थाने से फोन आया कि आपकी बेटी मिल गई है खुशी के आँसू खुद-ब-खुद बहने लगे। वे कहते हैं कि मेरी खुशी लौटाने के लिए मैं पुलिस और इस पूरे अभियान का सदैव ऋणी रहूँगा।

ऑपरेशन मुस्कान के संबंध में पुलिस अधीक्षक वैभव बेंकर ने बताया कि, यह अभियान उन बच्चों के लिए चलाया गया है जो किसी कारणवश अपने घरों से बिछड़ गए थे या गुमशुदा थे। अभियान में जिले की महिला एवं बाल संरक्षण इकाई, चाईल्ड लाईन, थाना स्तरीय पुलिस टीमों व अन्य संबंधित एजेंसियों का सक्रिय सहयोग रहा।

उन्होंने बताया कि ऑपरेशन मुस्कान का मुख्य उद्देश्य गुमशुदा, बेसहारा एवं तस्करी के शिकार बच्चों की पहचान कर उन्हें सुरक्षा देना है। बच्चों को ढूंढने में आधुनिक तकनीक, सोशल मीडिया, एवं स्थानीय खुफिया नेटवर्क का कुशलतापूर्वक उपयोग किया गया। बलरामपुर पुलिस की इस सफलता पर पुलिस अधीक्षक ने पूरी टीम को बधाई दी एवं आमजन से अपील की कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूक रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें।