सफेद फूलों से बना डिलाइट: वैद्यराज की 19 विशेष रेसिपी, बिना ग्लूकोज-सेकरीन!

भीषण गर्मी के दिनों में, जब शरीर प्यास के मारे लाचार होता है, एक ठंडा शरबत किसी वरदान से कम नहीं होता। राजस्थानी व्यंजनों के इस सफर में, हम आपको विशेष रूप से पाली के सफेद गुलाब से निर्मित शरबत के बारे में बताने जा रहे हैं। 68 साल पहले इस अनोखे शरबत को यहां के वैद्यराज ने आयुर्वेदिक विधि से तैयार किया था। पाली के अभिषेक कटारिया इस पारंपरिक शरबत के व्यापार का समृद्ध इतिहास सुनाते हैं, जिसमें उनके परदादा भागचंद कटारिया का महत्वपूर्ण योगदान है।

गोल निंबड़ा-उदयपुरिया बाजार में उनकी दवाईयों की दुकान से शुरुवात हुई थी, जहां गर्मी में आने वाले मेहमानों को चाय के बजाय शरबत पिलाया जाता था। धीरे-धीरे इस शरबत का स्वाद स्थानीय लोगों को भाने लगा। प्रारंभ में चार प्रकार के शरबत- खसखस, रोज, लेमन और अन्य फ्लेवर्स बनाए गए, जो बहुत पसंद किए गए। इस प्रकार ‘नवकार’ नाम का एक ब्रांड आकार लेने लगा। भागचंद कटारिया का 1995 में निधन हुआ, लेकिन उनके परिवार ने इस परंपरा को जीवित रखा।

अभिषेक और भावेश कटारिया, जो अब इस व्यापार को संभाल रहे हैं, ने मार्केट रिसर्च के बाद नए शरबत फ्लेवर विकसित किए। उन्होंने पाया कि लोग बिना किसी केमिकल के शरबत पसंद करते हैं। इस शोध के आधार पर, उन्होंने 19 प्रकार के नए फ्लेवर तैयार किए, जिनमें व्हाइट रोज, केसर चंदन, और पान शरबत प्रमुख हैं। अभिषेक का कहना है कि उनके द्वारा बनाए गए सफेद गुलाब के शरबत का कोई जवाब नहीं है, और इसे तैयार करने के लिए उनके पास विशेष सामग्री जैसे चांदी का बर्क और उच्च-गुणवत्ता वाली शक्कर का उपयोग होता है।

वर्तमान में, ये दोनों भाई मिलकर हर महीने लगभग 10,000 बोतल शरबत बेचते हैं। एक बोतल से लगभग 30 से 35 गिलास शरबत तैयार किया जा सकता है, और इसकी कीमत 165 से 350 रुपये तक होती है। उनके शरबत की गुणवत्ता और स्वाद की प्रशंसा उनके ग्राहकों द्वारा अंगीकार की जाती है। एक ग्राहक, सुरभि हिरावत का कहना है कि उन्हें गर्मी में चाय के बजाय नवकार शरबत पीना पसंद है। इसी तरह, विकास बुबकिया और मुंबई के बिजनेसमैन जय सुराणा ने भी इस शरबत की सराहना की, जो उन्हें सदियों से प्रचलित स्वाद का अनुभव कराता है।

पारंपरिक राजस्थानी शरबत न केवल गर्मी से राहत देता है, बल्कि यह लोगों के दिलों में एक विशेष स्थान बना चुका है। ऐसे में परिवारों का शुद्धता और गुणात्मकता को प्राथमिकता देकर नवकार शरबत का चुनाव करना, इस गोल्डन हेरिटेज की पुष्टि करता है। वे न सिर्फ स्वाद में बल्कि गुणवत्ता में भी बेजोड़ हैं, एवं इसी कारण से राजस्थानी संस्कृति के इस अद्भुत पेय को आज भी पसंद किया जा रहा है।