डीआरएम का बड़ा बयान: रेल सुरक्षा और यात्री सुविधाएं हो सबसे अहम प्राथमिकता!

जोधपुर के डीआरएम, अनुराग त्रिपाठी ने हाल ही में नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे एम्प्लाय यूनियन द्वारा आयोजित एक सेमिनार में कहा कि सुरक्षित रेल संचालन और यात्री सुविधाएं रेलवे के लिए प्राथमिकता हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन मामलों में कोई समझौता नहीं किया जा सकता, और रेलवे प्रशासन अपने कर्मचारियों के कल्याण के प्रति भी प्रतिबद्ध है। यह सेमिनार शनिवार को हरीश जोशी मार्ग स्थित यूनियन कार्यालय में आयोजित किया गया, जिसमें कई कर्मचारियों ने भाग लिया।

त्रिपाठी ने अपने उद्बोधन में कहा कि केवल उच्च कार्यकुशलता, ईमानदारी और सेवा भावना से ही सुरक्षित रेल संचालन को सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि रेलवे हमेशा अपने कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए努力रत है, ताकि वे अपने कार्य में उत्कृष्टता प्रदर्शन कर सकें। जोधपुर मंडल को स्वच्छ और आदर्श मंडल बनाने के लिए उन्होंने कर्मचारियों से सक्रिय सहयोग की अपील की और साथ ही इसके लिए कर्मचारी संगठनों की मांगों का समाधान करने का आश्वासन भी दिया।

इस सेमिनार में यूनियन के जोनल अध्यक्ष, मंडल मंत्री मनोज कुमार परिहार और जोनल महामंत्री मुकेश माथुर ने डीआरएम का स्वागत किया। यह त्रिपाठी का पदभार ग्रहण करने के बाद पहली बार यूनियन कार्यालय में आगमन था। सेमिनार के दौरान, माथुर और परिहार ने रेल कर्मचारियों की कॉमर्शियल और ऑपरेटिंग से जुड़ी समस्याओं पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने डीआरएम से मांग की कि सेफ्टी से जुड़े खाली पदों पर नई नियुक्तियों के लिए रेलवे बोर्ड को प्रस्ताव भेजा जाए।

इस अवसर पर कई अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित थे, जिनमें इंडियन रेलवे टिकट चेकिंग स्टाफ ऑर्गेनाइजेशन के मंडल सचिव के जे अय्यर, समदड़ी शाखा सचिव मनोज शर्मा, और मंडल उपाध्यक्ष जसवीर सिंह शामिल थे। इन सभी ने कॉमर्शियल और ऑपरेटिंग से जुड़ी समस्याएं उठाईं, और उनके समाधान की दिशा में चर्चा की गई। यूनियन के केंद्रीय सहायक मंडल मंत्री संजय मीणा और सहायक मंडल महामंत्री मोइन खान के साथ अन्य पदाधिकारी भी इस महत्वपूर्ण चर्चा में शामिल हुए।

सेमिनार के अंत में मंडल अध्यक्ष महेंद्र व्यास ने सभी उपस्थित जनों का धन्यवाद ज्ञापित किया, और सामाजिक-सांस्कृतिक माहौल में इस तरह के संवाद के महत्व पर बल दिया। इस सभी प्रयासों का उद्देश्य न केवल कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करना है, बल्कि रेलवे सेवा को और अधिक बेहतर और सुरक्षित बनाना भी है। इससे रेलवे प्रशासन और कर्मचारियों के बीच सहयोग और सामंजस्य बढ़ेगा, जो भारतीय रेलवे की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।