गहलोत की 33 योजनाएं बाहर, भजनलाल सरकार की 26 स्कीम्स पर बड़ा दांव!

राजस्थान राज्य सरकार ने हाल ही में पिछली कांग्रेस सरकार की 33 योजनाओं को फ्लैगशिप कार्यक्रम से बाहर कर दिया है। इनमें पेंशन योजनाएं, देवानारायण छात्रा स्कूटी योजना, और विदेशों में पढ़ने वाले प्रतिभाशाली छात्रों के लिए स्कॉलरशिप जैसी प्रमुख योजनाएँ शामिल हैं। नई बीजेपी सरकार ने पिछले गहलोत प्रशासन की योजनाओं को नजरअंदाज करते हुए, अपनी 26 नई योजनाओं को फ्लैगशिप कार्यक्रम का हिस्सा बनाते हुए उनमें विशेष ध्यान देने का निर्णय लिया है। इस बदलाव के परिणामस्वरूप, कांग्रेस सरकार की योजनाओं की मॉनिटरिंग अब उच्च स्तर पर नहीं की जाएगी, जैसा कि पहले हुआ करता था।

फ्लैगशिप कार्यक्रम में शामिल योजनाओं पर सरकार की विशेष निगाह होती है। मुख्यमंत्री, संबंधित मंत्री, और सचिव इन योजनाओं की लगातार मॉनिटरिंग करते हैं और यदि कोई कमी पाई जाती है, तो त्वरित समाधान किया जाता है। ज़िला स्तर पर अधिकारियों को इन स्कीम्स का निरीक्षण करने और खर्च की जानकारी भेजने की जिम्मेदारी होती है। इस प्रक्रिया में हर महीने मुख्यमंत्री को रिपोर्ट पेश की जाती है, जिससे योजनाओं की स्थिति स्पष्ट होती है।

नई बीजेपी सरकार द्वारा विधानसभा में 26 नई योजनाओं को फ्लैगशिप प्रोग्राम में शामिल करने का निर्णय निश्चित रूप से गहलोत सरकार की योजनाओं के प्रति एक कटु संदेश है। इनमें खाद्य सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, और स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाएं शामिल हैं। इसके विपरीत, गहलोत सरकार की पूर्व फ्लैगशिप योजनाओं को योजनाबद्ध तरीके से बाहर किया गया है, जो कांग्रेस की सरकार के समय के सामाजिक कल्याण प्रयासों को कमजोर करने के रूप में देखा जा रहा है।

इस राजनीतिक बदलाव पर कांग्रेस के नेता, जैसे कि गोविंद सिंह डोटासरा और टीकाराम जूली, ने बड़ा सवाल उठाया है। उनका आरोप है कि वर्तमान सरकार जानबूझकर कांग्रेस के जनकल्याणकारी प्रयासों को या तो समाप्त कर रही है या उन्हें कमजोर बना रही है। वे इसे एक सुनियोजित एजेंडे के तहत करार देते हैं, जो जनता के हित में नहीं है। उनका कहना है कि इस प्रकार की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का कोई अर्थ नहीं है, और इससे केवल आम जनता को नुकसान होगा।

राजनीतिक परिवर्तन के इस दौर में, फ्लैगशिप योजनाओं का चयन और कार्यान्वयन एक बार फिर से चर्चा का विषय बन गया है। बीते वर्षों में, कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही सरकारों ने एक-दूसरे की योजनाओं को समाप्त करना या कमजोर करने के लिए आरोप-प्रत्यारोप किए हैं। अब यह देखना होगा कि वर्तमान सरकार अपनी नई योजनाओं के माध्यम से कैसे आगे बढ़ती है और क्या वे वास्तव में जनता के कल्याण के लिए प्रभावी साबित होती हैं या फिर राजनीतिक प्रतिशोध की बाय-product बन जाती हैं। राजस्थान में राजनीतिक खेल और जनता के हितों का सामंजस्य स्थापित करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण समय है।