भरतपुर में डमी कैंडिडेट के साथ एसआई बना, एसओजी ने 3 गिरफ्तार किए!

राजस्थान में एसआई भर्ती परीक्षा-2021 में डमी कैंडिडेट की मदद से पास होने का मामला सामने आया है, जिसमें गिरफ्तार किए गए एक सब-इंस्पेक्टर (एसआई) ने अपनी जगह परीक्षा देने के लिए एक अन्य व्यक्ति को 5 लाख रुपये का भुगतान किया था। यह आरोपी, वीरेंद्र मीणा, जो कि वर्तमान में भरतपुर में रिजर्व पुलिस लाइन में तैनात था, ने ओमप्रकाश विश्नोई नामक डमी कैंडिडेट की सहायता से परीक्षा पास की। एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) द्वारा की गई जांच में आरोपी की फोटो और हस्ताक्षर में असमानता पाई गई, जिसके बाद उसे भरतपुर से गिरफ्तार किया गया।

एसओजी के एडीजी, वी.के. सिंह ने बताया कि आरोपी वीरेंद्र बामनवास (सवाई माधोपुर) क्षेत्र से संबंधित है। उसने जोधपुर स्थित परीक्षा केंद्र पर ओमप्रकाश विश्नोई को भेजकर अपनी जगह परीक्षा दी। विश्नोई, जो कि एक शिक्षा संस्थान में राजनीति विज्ञान का व्याख्याता है, बाड़मेर के भाकरपुरा का निवासी है। वीरेंद्र की परीक्षा में मेरिट रैंक 779 रही, लेकिन जांच के दौरान उसकी फोटो और हस्ताक्षर में भिन्नताएं सामने आईं, जिससे उसकी स्थिति संदिग्ध हुई।

इस मामले में एसओजी ने न केवल वीरेंद्र को गिरफ्तार किया बल्कि वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा-2021-22 में भी दो अन्य शिक्षकों को डमी कैंडिडेट की मदद से पास होने के आरोप में गिरफ्तार किया। ये शिक्षक देवाराम चितलवाना और प्रवीण कुमार धनाऊ हैं, जो क्रमशः जालोर और बाड़मेर से हैं। दोनों ने विज्ञान विषय के लिए परीक्षा दी थी और जांच में पाया गया कि उन्होंने माफियाओं के साथ मिलकर परीक्षा के दौरान अपनी जगह डमी कैंडिडेट को बैठाया था।

देवाराम का परीक्षा केंद्र उदयपुर था, जबकि प्रवीण का जोधपुर में था। दोनों ही शिक्षक वर्तमान में द्वितीय श्रेणी के अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। एसओजी अब इन दोनों से उनकी गतिविधियों के बारे में पूछताछ कर रही है, ताकि इस पूरे मामले की गहराई तक पहुंचा जा सके।

सभी गिरफ्तारियों से यह स्पष्ट होता है कि राजस्थान में परीक्षा प्रणाली में धांधली को लेकर गहरी जांच की जा रही है। इस प्रकार के मामलों को लेकर एसओजी की सख्त कार्रवाई इस बात का संकेत है कि छात्रों और अभ्यर्थियों के लिए एक पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए सरकार के प्रयास जारी हैं। ऐसे मामलों की जांच से यह भी पता चलता है कि कैसे कुछ लोग अपनी गलती को छिपाने के लिए अवैध तरीकों का सहारा लेते हैं, जो कि शिक्षा प्रणाली के लिए घातक है।