मोहाली में खालिस्तानी नारे: पन्नू ने वीडियो में दी चेतावनी, एयरपोर्ट बंद और मोदी-शाह पर हमला!

पंजाब के मोहाली में खालिस्तान समर्थक संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ (SFJ) के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक बार फिर विवादित बयान देते हुए भारतीय नेताओं को निशाना बनाया है। पन्नू ने एयरपोर्ट रोड कुंबड़ा पर देश विरोधी नारे लिखवाए हैं, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को “हिंदू आतंकवादी” के रूप में संबोधित किया गया। उसने सिख युवाओं से 17 नवंबर को पंजाब में अमृतसर एवं चंडीगढ़ एयरपोर्ट को बंद करने का आह्वान किया है। यह बयान स्पष्ट रूप से समाज में धार्मिक और सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न करने का प्रयास है।

पन्नू ने अपने वीडियो संदेश में प्रवासियों द्वारा हाल ही में एक सिख युवक की हत्या का उल्लेख करते हुए इसे “हिंदू आतंकवाद” का परिणाम बताया है। उसने धमकी दी कि इन “हिंदू आतंकियों” की जड़ों को अयोध्या से उखाड़ फेंकने की आवश्यकता है। पन्नू का यह आह्वान न केवल सिखों को भड़काने का प्रयास है, बल्कि इससे पंजाब के सामाजिक और आर्थिक ढांचे को प्रभावित करने का भी इरादा नजर आता है। यह स्थिति सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।

उल्लेखनीय है कि पन्नू की यह बयानबाजी अकेली नहीं है। इससे पहले भी उसने एयरपोर्ट बंद करने की धमकी दी थी, जब उसने सिख कर्मियों को एयरपोर्ट पर कृपाण न पहनने का आदेश जारी किया था। पन्नू ने कहा था कि भारत सरकार भविष्य में सिखों के धार्मिक प्रतीकों, जैसे दस्तार और पगड़ी, पर भी प्रतिबंध लगा सकती है। इसका स्पष्ट उद्देश्य सिख समुदाय में भय और असंतोष पैदा करना है, जिससे वे उसकी विचारधारा के प्रति आकर्षित हो सकें।

गौरतलब है कि SFJ पर भारत सरकार ने 2019 में बैन लगा दिया था और इसे आतंकवादी गतिविधियाँ चलाने के लिए उत्तरदायी माना गया। पन्नू खुद 2020 में UAPA के तहत आतंकवादी घोषित किया गया और उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। सोशल मीडिया पर उसकी सक्रियता लगातार बढ़ती जा रही है, जहां वह हिंसक विचारधारा का प्रचार कर रहा है। उसने पिछले कुछ वर्षों में कई बार भड़काऊ वीडियो और ऑडियो संदेश जारी कर युवाओं को भारत के खिलाफ भड़काने का कार्य किया है।

पन्नू की गतिविधियाँ न केवल भारतीय सुरक्षा के लिए समस्या उत्पन्न करती हैं, बल्कि इससे पंजाब की शांतिपूर्ण परंपरा को भी गंभीर खतरा है। उसके द्वारा फैलाई गई नफरत और भड़काऊ विचारधारा सामुदायिक सौहार्द और शांति को बाधित कर सकती है। इसलिए, इस तरह की स्थिति पर कड़ी नज़र रखना जरूरी है और संबंधित एजेंसियों को इस मुद्दे की गंभीरता को समझना होगा। भारत में इस तरह की अलगाववादी प्रवृत्तियों के खिलाफ समुचित कार्रवाई करना अब समय की आवश्यकता बन गई है।