भारत-कनाडा विवाद: इमिग्रेशन बिजनेस 70% नीचे, IELTS छात्रों की संख्या आधी हुई!
हाल के महीनों में भारत और कनाडा के बीच के संबंधों में आई खटास ने कई भारतीयों को उलझन में डाल दिया है, विशेषकर उन छात्रों और पेशेवरों के लिए जो कनाडा में भविष्य बनाने की सोच रहे हैं। कूटनीतिक विवाद का इमिग्रेशन, वर्क और स्टूडेंट वीजा पर असर पड़ने की संभावना के चलते लोग यह सवाल करने लगे हैं कि क्या कनाडा फिर से भारतीय छात्रों को वीजा देने में उतनी तत्परता दिखाएगा जितनी पहले होती थी। क्या कनाडा में पढ़ाई करना अब केवल एक सपना बनकर रह जाएगा? इस विषय पर दैनिक भास्कर ने कई वीजा विशेषज्ञों से चर्चा की, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वर्तमान कूटनीतिक हालात का इमिग्रेशन नीतियों पर प्रभाव दिख रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के विवादों का सीधा असर कनाडा में स्टूडेंट वीजा आवेदनों में आई भारी गिरावट पर पड़ा है। पिछले वर्ष के एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर एक खालिस्तान समर्थक नेता की हत्या में संलिप्तता का आरोप लगाया था, जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा। इसके नतीजे के तौर पर, छात्रों की संख्या में 70 प्रतिशत की कमी आई है, विशेषकर पंजाबियों, हरियाणवियों और गुजरातियों के बीच। इस समय, भारतीय छात्र कनाडा जाने के बजाय अन्य विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि कनाडा के वीजा नियमों में बदलाव के साथ-साथ जीआईसी (गुरु इंडिया कंडीशन) खाते की राशि को बढ़ाना भी प्रमुख कारकों में से एक है। भारतीय छात्र अब कनाडा की अपेक्षा अन्य देशों, जैसे ऑस्ट्रेलिया और यूके के विकल्पों को प्राथमिकता देने लगे हैं। हालाँकि, ऑस्ट्रेलिया के वीजा प्रक्रिया की कठिनाइयों के कारण उनकी प्राथमिकता में यह देश भी चुनौतीपूर्ण होता है। वीजा विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा के उच्च स्तर के लिए आइलेट्स टेस्ट की मांग भी घट रही है, जिसका स्पष्ट असर स्टूडेंट वीजा आवेदनों पर पड़ा है।
दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट में सुमीत जैन ने कहा कि कनाडा में वीजा प्रक्रिया में लाए जा रहे बदलावों ने छात्रों का रुझान कम किया है। इस समय इमिग्रेशन इंडस्ट्री के लिए चुनौतीपूर्ण समय है, और उन्होंने कहा कि अगले वर्ष चुनाव होने के कारण स्थिति में बदलाव की संभावना है। वहीं, सुकांत त्रिवेदी ने कनाडा में काम के अवसरों और महंगे रहने के खर्च को भी छात्रों के कनाडा जाने में कम रुचि का मुख्य कारण बताया है।
हरसौरभ सिंह बजाज ने भी इस विषय पर चर्चा की और बताया कि पिछले साल की तुलना में केवल 30 प्रतिशत छात्र कनाडा जाने में रुचि दिखा रहे हैं। जीआईसी की बढ़ती लागत और संबंधित खर्चों में इजाफा छात्रों के लिए मुख्य चुनौती बन गई है। इसके चलते, कनाडा की शिक्षा प्रणाली को लेकर छात्रों के मन में संदेह उत्पन्न हो रहा है, और वे अधिक किफायती विकल्पों की तलाश में हैं।
कुल मिलाकर, भारत और कनाडा के बीच चल रहे विवादों का न केवल राजनैतिक, बल्कि शैक्षणिक मामलों पर भी गहरा प्रभाव डाला है। जबकि कुछ विशेषज्ञ आशा व्यक्त कर रहे हैं कि भविष्य में स्थिति में सुधार हो सकता है, तब तक भारतीय छात्र बेहतर विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।









