पंजाब-हरियाणा में चंडीगढ़ को लेकर रण, BJP नेताओं में तकरार का नया दौर!

हरियाणा की नई विधानसभा को लेकर चंडीगढ़ में ज़मीन आवंटन के मामले पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में हरियाणा में भाजपा की सरकार है, लेकिन इसके बावजूद पंजाब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने ज़मीन को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज की है। जाखड़ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध किया है कि वे हस्तक्षेप कर ज़मीन की आवंटन प्रक्रिया को रोकें। दूसरी ओर, पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP), कांग्रेस, और शिरोमणि अकाली दल ने भी इस निर्णय के खिलाफ अपनी आवाज उठाई है। हरियाणा के परिवहन मंत्री अनिल विज ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को चेतावनी देते हुए कहा कि चंडीगढ़ तभी पंजाब का है जब हिंदी भाषी क्षेत्र हरियाणा को उचित स्थान दिया जाए।

इस विवाद के बीच, हरियाणा विधानसभा की नई बिल्डिंग के निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने 11 नवंबर को एक गैजेट नोटिफिकेशन जारी किया है। हरियाणा को चंडीगढ़ के आईटी पार्क के पास ज़मीन दी गई है, जो पंचकूला से जुड़ा हुआ है। मंत्री अनिल विज ने पंजाब के सीएम भगवंत मान के बयानों पर पलटवार करते हुए कहा कि चंडीगढ़ तब पंजाब का हो सकता है, जब हरियाणा को उसके हिस्से का अधिकार मिले। उन्होंने यह भी बताया कि जब पंजाब और हरियाणा का विभाजन हुआ, तब हरियाणा को वर्तमान विधानसभा परिसर की व्यवस्था के अनुसार समायोजित किया गया था, और अब हरियाणा को अधिक स्थान की आवश्यकता है।

पंजाब भाजपा के प्रमुख सुनील जाखड़ ने कहा कि चंडीगढ़ सिर्फ एक ज़मीन का टुकड़ा नहीं है, बल्कि इससे लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। उन्होंने इस निर्णय पर दोबारा विचार करने की अपील की और कहा कि इससे जनता को ठेस पहुंचेगी। दूसरी तरफ, भाजपा की राज्यसभा सांसद किरण चौधरी ने कहा कि चंडीगढ़ किसी एक पार्टी की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वास्तव में यह एक प्रदेश का साझा हिस्सा है, और चंडीगढ़ को लेकर बनी सभी व्यवस्थाएं पिछले समझौतों के आधार पर होनी चाहिए।

पंजाब की पूर्व AAP मंत्री अनमोल गगन मान ने इस मुद्दे पर संगठन की ओर से पूरी ताकत से लड़ने की बात कही है, और धरने और प्रदर्शन तक जाने की चेतावनी दी है। इसी तरह, पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह चंडीगढ़ पर पंजाब के हक में कमी लाने के प्रयास कर रही है। शिरोमणि अकाली दल के प्रवक्ता अर्शदीप सिंह कलेर ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह पंजाब के हकों पर बड़ा आघात है।

यहां तक कि हरियाणा विधानसभा का सत्र भी जारी है, जिसमें विभिन्न मुद्दों पर चर्चा चल रही है। इस विवाद ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, और यह स्पष्ट है कि चंडीगढ़ को लेकर कोई भी निर्णय अब बिना विवाद के नहीं लिया जाएगा। सभी पक्ष अपनी-अपनी आवाज उठाते रहेंगे, और यह देखना होगा कि मामला किन दिशा में आगे बढ़ता है।