पंजाब यूनिवर्सिटी अनुदान के बिना: ब्वॉज हॉस्टल का निर्माण दो साल से अधूरा!
पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) में लड़कियों के हॉस्टल नंबर-11 के निर्माण में देरी और नए ब्वॉज हॉस्टल की योजना को लेकर समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। पीयू प्रबंधन का कहना है कि राज्य सरकार से अभी तक आवश्यक ग्रांट नहीं मिली है, जिससे न केवल निर्माण कार्य ठप पड़ा है, बल्कि छात्राओं को भी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। खासकर, हॉस्टल नंबर-11 का निर्माण अधूरा रहने के कारण इसे छात्राओं को आवंटित नहीं किया जा सकता है। प्रबंधन ने यह स्पष्ट किया है कि जब तक हॉस्टल का निर्माण पूरा नहीं होगा, इसे उपयोग में नहीं लाया जा सकता।
इस बीच, पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए बताया कि पीयू प्रबंधन ने अब तक सरकार को निर्माण कार्य से संबंधित कोई भी बिल नहीं भेजे हैं। इसी कारण ग्रांट जारी करने में अड़चने आ रही हैं। ऐसे में, छात्राएं सेक्टर-15 और अन्य क्षेत्रों में पेइंग गेस्ट (पीजी) के रूप में रहने को मजबूर हैं। पिछले साल से ही हॉस्टल के अधूरे निर्माण की समस्या के कारण छात्राओं का जीवन असुविधाओं से भरा हुआ है।
पंजाब सरकार ने अगस्त 2022 में घोषणा की थी कि लड़कियों के हॉस्टल में दो अतिरिक्त मंजिलें बनाने के लिए 50 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की जाएगी। हालाँकि, इस घोषणा के बाद से न तो ग्रांट जारी किया गया है और न ही हॉस्टल के निर्माण में कोई प्रगति देखने को मिली है। ऐसे में, यह निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है, जो छात्राओं की शिक्षा और रहने की सुविधा को प्रभावित कर रहा है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि अधूरे हॉस्टल में सुरक्षा के अभाव के कारण पिछले वर्ष चोरी की कई घटनाएं हुईं। चोरों ने 22 बड़े दरवाजों और 177 पानी की टंकियों को चुराकर पीयू प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए हैं। योजना यह थी कि पीयू इस हॉस्टल को सत्र 2022-23 में छात्राओं के लिए खोल देगी, लेकिन कोरोना महामारी और निर्माण में देरी के चलते यह सुनिश्चित नहीं हो पाया है।
अब छात्राएं और उनके अभिभावक दोनों ही पीयू प्रबंधन और राज्य सरकार से सवाल कर रहे हैं। उनका स्पष्ट सवाल है कि जब सरकार ने हॉस्टल निर्माण के लिए ग्रांट की घोषणा की थी, तब इसे अब तक क्यों नहीं जारी किया गया? इसके अलावा, प्रबंधन द्वारा समय पर बिल न भेजने से भी बच्चियों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यह सभी घटनाएं न केवल इन छात्राओं की परेशानियों को बढ़ा रही हैं, बल्कि शिक्षा प्रणाली पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं। ऐसे में, यह आवश्यक है कि सरकार और विश्वविद्यालय प्रबंधन जल्दी से जल्दी इस समस्या का समाधान निकालें ताकि छात्राएं अपनी शिक्षा को निर्बाध रूप से जारी रख सकें।









