चंडीगढ़ निगम को मिलेगा नया नेतृत्व, कल संभाल लेंगे 2008 बैच के IAS अधिकारी का कार्यभार!

चंडीगढ़ नगर निगम के आयुक्त के रूप में पंजाब कैडर के 2008 बैच के IAS अमित कुमार सोमवार को कार्यभार संभालने वाले हैं। केंद्रीय सरकार ने पहले ही उनके नाम पर अपनी मुहर लगा दी थी और इसके बाद पंजाब सरकार ने भी इस पद पर उनके नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। अपनी नियुक्ति के बाद, अमित कुमार नगर निगम के सामान्य सदन (जनरल हाउस) और वित्त तथा लेखा समिति (एफांडसी) की बैठक में शामिल होंगे। उनकी नियुक्ति के बाद यह महत्वपूर्ण बैठकें होने वाली हैं जो नगर निगम के लिए अभूतपूर्व रह सकती हैं।

पंजाब सरकार ने IAS आनंदिता मित्रा की पदमुक्ति के पश्चात नगर निगम कमिश्नर के पद के लिए तीन नामों का पैनल प्रस्तुत किया था, जिसमें IAS रामवीर, अमित कुमार और गिरीश दयालन शामिल थे। केंद्रीय गृह मंत्रालय की अप्वाइंटिंग कमेटी ने 5 अक्टूबर को अमित कुमार के नाम पर अपनी स्वीकृति प्रदान की। आनंदिता मित्रा के केंद्र से रिलीव होने पर, 20 सितंबर को केंद्र सरकार ने उनकी सेवा अवधि तीन महीने के लिए बढ़ाने का फैसला किया था। इससे पहले पंजाब सरकार ने भी उन्हें नई जिम्मेदारी सौंपी थी। चंडीगढ़ नगर निगम के कमिश्नर की नियुक्ति को लेकर कुछ समय से स्पष्टता नहीं थी, लेकिन केंद्र सरकार के आदेश ने स्थिति को स्पष्ट कर दिया है।

आने वाले समय में चंडीगढ़ के डिप्टी कमिश्नर विनय प्रताप सिंह को भी रिहा किया जा सकता है, क्योंकि केंद्र सरकार ने उन्हें एक महत्वपूर्ण नई जिम्मेदारी सौंपी है। इसके अतिरिक्त, चंडीगढ़ नगर निगम में नए चीफ इंजीनियर के रूप में संजय अरोड़ा की नियुक्ति की गई है। संजय अरोड़ा वर्तमान में दिल्ली में एनडीएमसी में चीफ इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। हालांकि, उन्हें चंडीगढ़ में शामिल होने में कुछ समय लग सकता है क्योंकि दिल्ली सरकार ने अभी तक उन्हें रिहा नहीं किया है। संजय अरोड़ा ने 1998 में यूटी प्रशासन में UPSC के माध्यम से एसडीए के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं और वे इससे पहले भी नगर निगम में काम कर चुके हैं।

इस प्रकार, चंडीगढ़ नगर निगम का नेतृत्व नए बदलावों और नियुक्तियों के माध्यम से उभरता दिख रहा है। अमित कुमार के आगमन का नगर निगम पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है। उनकी पूर्व सेवा और अनुभव के साथ, वे निगम के विकास में योगदान देने के लिए तैयार हैं। अब सभी की नज़रें इस पर हैं कि क्या वे नगर निगम की चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियों को संभालने में सफल होंगे और किस प्रकार की नीतियों और योजनाओं का कार्यान्वयन करेंगे।