गोल्डन टेंपल आत्महत्या कांड की जांच करेंगी IPS मनीषा: हाईकोर्ट का आदेश!
अमृतसर में स्थित स्वर्ण मंदिर के बाहर एक आत्महत्या की घटना ने सुरक्षा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले की जांच की जिम्मेदारी हरियाणा कैडर की आईपीएस अधिकारी मनीषा चौधरी को सौंपी गई है। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने इस प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए आईपीएस चौधरी को नियुक्त किया, जो वर्तमान में हरियाणा में प्रशासनिक कार्यों की अतिरिक्त महानिरीक्षक हैं। इस घटना में एक व्यक्ति ने न्यायाधीश की सुरक्षा में तैनात ASI से उसकी पिस्तौल छीनकर आत्महत्या कर ली, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था की खामियों का खुलासा हुआ है।
स्वर्ण मंदिर के बाहर हुए इस आत्मघाती घटना ने न केवल स्थानीय बल्कि पूरे पंजाब में सुरक्षा पैटर्न पर ध्यान केंद्रित किया है। इस घटना ने एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया है कि मंदिर जैसी पवित्र जगहों पर सुरक्षा का स्तर क्या है। उच्च न्यायालय ने निर्देशित किया है कि होंगी चौधरी को साप्ताहिक आधार पर जांच प्रगति की रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। कोर्ट का यह भी कहना है कि सुरक्षा चूक को लेकर पंजाब पुलिस पर की गई टिप्पणियों को हटाने का आदेश दिया गया है, ताकि पुलिस बल की विश्वसनीयता पर कोई संदेह न जाए।
पंजाब सरकार ने भी इन टिप्पणियों को हटाने का अनुरोध किया था, जिससे पुलिस की छवि को कोई नुकसान न पहुंचे। इस मामले में तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। पहली एफआईआर भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (छीनने) के तहत दर्ज की गई है, जबकि अन्य दो राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम की धारा 285 (सार्वजनिक मार्ग में बाधा डालना) और धारा 8-बी (दुर्व्यवहार द्वारा राजमार्ग को नुकसान पहुंचाना) के तहत हैं। ये एफआईआर अमरावती के ई-डिवीजन पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई हैं।
मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल की खंडपीठ के सामने होगी। अदालत इस सुनवाई के दौरान अब तक की जांच की प्रगति पर सुनवाई करेगी। स्वर्ण मंदिर के बाहर हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की वृत्ति को खोलकर रख दिया है और इससे स्पष्ट है कि सुरक्षा तैयारियों की व्यापक समीक्षा की आवश्यकता है, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
इस घटना ने न केवल अमृतसर बल्कि पूरे देश में मंदिरों और पूजा स्थलों की सुरक्षा के विषय में चर्चा छेड़ दी है। सुरक्षा प्रबंधनों के प्रति यह एक बड़ा संकेत है और यह दर्शाता है कि हमें सुरक्षा उपायों में सुधार की तुरंत आवश्यकता है। इस मामले पर न्यायालय का ध्यान और आईपीएस मनीषा चौधरी की नियुक्ति से आशा है कि जल्द ही मामले की गहन जांच होगी और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।









