एसएडी मांगों पर गवर्नर से मुलाकात करेगा, उम्मीदवार चयन पर संसदीय बोर्ड का फैसला तय करता!
**शिरोमणि अकाली दल की कोर कमेटी की बैठक: किसान मुद्दों पर चर्चा और उपचुनाव की तैयारियाँ**
आज एक महत्वपूर्ण बैठक शिरोमणि अकाली दल (SAD) की कोर कमेटी की हुई, जिसकी अध्यक्षता पार्टी के कार्यकारी प्रधान बलविंदर सिंह भूदड़ ने की। इस बैठक में पंजाब की मंडियों में चल रही धान की खरीद को लेकर गंभीर चर्चा हुई। वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने यह जानकारी दी कि वह जल्द ही पंजाब के गवर्नर से मुलाकात करने की योजना बना रहे हैं, जिसके लिए समय मांगा गया है। उन्होंने किसानों की परेशानी को उजागर करते हुए कहा कि खरीद प्रक्रिया में धक्का हो रहा है और धान की कीमतें भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम हैं, जिससे किसानों को हजारों करोड़ का नुकसान हो रहा है।
बैठक में एसजीपीसी प्रधान पद के चुनाव पर भी चर्चा की गई। बैठक में मौजूद नेताओं ने बताया कि बीजेपी, आम आदमी पार्टी और अकाली दल के बीच एक नया गठबंधन बन गया है। इस गठबंधन के तहत, पंजाब सरकार के अधिकारी और भाजपा के कुछ सदस्य मेंबरों से बीबी जागीर कौर के पक्ष में मतदान करने की अपील कर रहे हैं। मजीठिया ने विधानसभा उपचुनाव के उम्मीदवारों को लेकर सवाल पर कहा कि अभी अफवाहों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है, क्योंकि पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक जल्द ही होगी जो इस विषय पर निर्णय लेगी।
अकाली दल के लिए इन चार विधानसभा सीटों का उपचुनाव महत्वपूर्ण है, खासकर गिद्दड़बाहा सीट, जो पार्टी का पारंपरिक गढ़ रही है। प्रकाश सिंह बादल ने इस सीट से कई बार जीत हासिल की है। पार्टी की नेतृत्व टीम में हरसिमरत कौर बादल भी इस सीट की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। बैठक में यह भी तय किया गया कि हीरा सिंह गाबड़िया को बरनाला शहरी और इकबाल सिंह झूंदा को बरनाला ग्रामीण के प्रचार प्रभारी का काम सौंपा गया है।
गिद्दड़बाहा सीट से पार्टी की संभावित उम्मीदवारों की सूची में सुच्चा सिंह लंगाह का नाम भी सामने आया है, उन्हें डेरा बाबा नानक से उम्मीदवार बनाने की संभावना है। गिद्दड़बाहा सीट पर सुखबीर बादल का नाम भी चर्चा में है, जबकि बरनाला में कुलवंत सिंह कांता की दावेदारी को लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं। इन चार क्षेत्रीय सीटों पर चुनाव अप्रत्याशित रूप से महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इन सीटों पर चुनाव होना आवश्यक है, जो हाल ही में सांसद बने विधायकों के इस्तीफे के कारण खाली हो गई थीं।
इस प्रकार, SAD आगामी चुनावों के लिए पूरी तैयारी कर रही है, जिसमें पार्टी की रणनीतियों के तहत किसानों के मुद्दों को लेकर भी गहन विचार किया जा रहा है। चुनावी मैदान में अन्य दलों से मुकाबला करने के लिए अकाली दल का फोकस अभी से मजबूत दिख रहा है।









