तरनतारन में वोटर सूची में हेराफेरी, कांग्रेस ने दी हाईकोर्ट जाने की चेतावनी

पंजाब में चल रहे पंचायत चुनावों के दौरान कई स्थानों पर मतदाताओं को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। खासकर तरनतारन जिले के ग्रामीण इलाकों में वोटर सूचियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी देखी जा रही है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि उनकी वोटिंग जानकारी को अव्यवस्थित तरीके से एक वार्ड से दूसरे वार्ड में स्थानांतरित कर दिया गया है। ऐसे में जो लोग चुनावी प्रक्रिया में भाग लेना चाहते हैं, उन्हें अपने वोट को सही कराने के लिए एसडीएम कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता राजबीर सिंह भुल्लर ने आज एसडीएम से मिलने का निर्णय लिया। उनके साथ कई अन्य पंच और सरपंच भी इस मुलाकात में शामिल हुए। भुल्लर ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि तरनतारन क्षेत्र के गांवों की मतदाता सूचियों में व्यापक स्तर पर हेरफेर किया गया है। उन्होंने बताया कि कई मतदाताओं के वोट न केवल काट दिए गए हैं, बल्कि कुछ के वोट तो अन्य वार्ड में स्थानांतरित कर दिए गए हैं। इससे प्रभावित मतदाता अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, और कांग्रेस नेता ने इस संबंध में सरकार की नPolicies पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

राजबीर सिंह भुल्लर ने स्पष्ट किया कि यह स्थिति बिल्कुल गलत है और वह इसके खिलाफ आवाज उठाने के लिए तत्पर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वह उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे। उनका यह स्पष्ट संदेश है कि वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली किसी भी तरह की गड़बड़ी को सहन नहीं करेंगे।

इस दौरान जब स्थानीय एसडीएम से इस विषय पर प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। यह स्थिति इस बात को रेखांकित करती है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों की ओर से ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है। मतदाता अधिकारों की हिफाजत और चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए संबंधित अधिकारियों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

पंचायत चुनावों में हो रही अनियमितताओं के चलते ग्रामीणों में आक्रोश फैल रहा है, और चुनावी माहौल बाधित होने की आशंका भी बढ़ रही है। राजनीतिज्ञों से लेकर स्थानीय निवासियों तक सभी इस बात पर एकमत हैं कि इसके खिलाफ उठने वाली आवाज़ों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। अब समय आ गया है कि समस्याओं का समाधान किया जाए ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाया जा सके।