संवत्सरी पर्व पर निकला वरघाेड़ा, श्री आदिनाथ मंदिर और चिंतामणी मंदिर पहुंच साध्वीवृंद ने क्रिया में किया चैत्य वंदन
बीकानेर, 15 सितंबर । पर्युषण पर्व के आठवें और अंतिम दिन मंगलवार काे जैन धर्म में आत्मशुद्धि, क्षमा और अहिंसा का सबसे पवित्र दिन संवत्सरी पर्व रांगड़ी चाैक स्थित श्री सुगनजी महाराज के उपासरे में मनाया गया।
उपासरा ट्रस्ट के अध्यक्ष महावीर सिंह खजांची ने बताया कि साध्वी मुक्तांजनाश्रीजी म.सा. के प्रवचन के बाद वरघाेड़ा (शाेभायात्रा) निकाला गया। उन्हाेंने बताया कि संवत्सरी के पावन अवसर पर विशेष प्रवचन के बाद जिनेन्द्र भगवान की महिमा में वरघाेड़ा निकाला गया।
ट्रस्ट के काेषाध्यक्ष प्रमाेद गुलगुलिया ने बताया कि वरघोड़ा में जैन समाज के बड़ी संख्या में महिलाएं-पुरुष हर्षोल्लास के साथ शामिल रहे। बाद में सभी ने एक-दूसरे को ‘मिच्छामी दुक्कड़म्’ कहकर क्षमा मांगी। उन्हाेंने बताया कि यह आयोजन आत्म-शुद्धि, अहिंसा और भाईचारे के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
ट्रस्ट के सहमंत्री मनीष नाहटा ने बताया कि वरघाेड़ा नाहटा माेहल्ला स्थित श्री आदिनाथ मंदिर पहुंचा उसके बाद भुजिया बाजार के चिंतामणी मंदिर पहुंचने के बाद विभिन्न रास्ताें से हाेकर रांगड़ी चाैक में उपासरे पहुंचा। इस दाैरान मंदिर की क्रिया में चैत्य वंदन और शाम काे प्रतिक्रमण किया गया।
वरघाेड़े में चित्तलेहांजनाश्री जी म.सा., सुरक्षांजनाश्रीजी म.सा., साैम्यांजनाश्रीजी म.सा., चित्तखरांजनाश्रीजी म.सा. में शामिल हुए।
ट्रस्टी संदीप मुसरफ ने बताया कि इससे पहले साध्वी मुक्तांजनाश्रीजी म.सा. ने प्रवचन में बताया कि संवत्सरी का अर्थ वार्षिक दिवस है। इस दिन जैन अनुयायी उपवास, प्रार्थना और ध्यान के जरिए अपने साल भर के कर्मों का लेखा-जोखा करते हैं और आत्मा को निर्मल बनाते हैं। इस पावन अवसर पर लोग आपसी वैर-भाव, क्रोध और अहंकार को मिटाकर नए सिरे से प्रेम और करुणा के साथ जीने का संकल्प लेते हैं। इस दाैरान साध्वी मुक्तांजनाश्री जी म.सा. ने कल्पसूत्र में श्लाेकाें का वाचन भी किया।
अजय खजांची, सुरेंद्र खजांची, मालचंद बेगाणी, धीरज बरड़िया भी पर्युषण पर्व काे लेकर जुटे रहे।









