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45 मिनट तक लिफ्ट में कैद रहे 13 लोग, बेहोश हुई किशोरी, सुरक्षा मानकों की पुलिस ने शुरु की जांच

बरेली, 22 जून । उत्तर प्रदेश के बरेली शहर में सिविल लाइंस स्थित सिटी सेंटर एलए मॉल में लिफ्ट फंसने की घटना ने मॉल की सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार रात बिजली गुल होने के बाद लिफ्ट में फंसे 13 लोगों को करीब 35 से 45 मिनट तक घुटन और उमस झेलनी पड़ी। इस दौरान एक किशोरी बेहोश हो गई थी। घटना के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और मॉल प्रबंधन के खिलाफ हंगामा हुआ। अब पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

लिफ्ट में मौजूद लोगों का आरोप है कि आपात स्थिति में सबसे पहले उन्होंने अलार्म बटन दबाया और लिफ्ट में लिखे हेल्पलाइन नंबर पर बार-बार कॉल की, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। अंदर मौजूद लोगों का कहना है कि यदि समय रहते बाहर मौजूद लोगों ने मदद न की होती तो हालात और बिगड़ सकते थे। सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों और महिलाओं को हुई।

घुटन से बिगड़ी हालत, रोने लगे बच्चे

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक लिफ्ट बंद होने के कुछ मिनट बाद ही अंदर घुटन बढ़ने लगी। छोटे बच्चे लगातार रोते रहे जबकि महिलाएं उन्हें संभालने का प्रयास करती रहीं। इसी दौरान एक किशोरी की तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गई। बाहर निकलने के बाद उसे पानी पिलाकर और प्राथमिक मदद देकर सामान्य किया गया।

लिफ्ट में नहीं था ऑपरेटर, बढ़ी मुश्किल

घटना के बाद सामने आया कि रात के समय लिफ्ट में कोई ऑपरेटर तैनात नहीं था। जानकारों का कहना है कि यदि प्रशिक्षित ऑपरेटर मौजूद होता तो घबराए लोगों को सुरक्षा नियमों की जानकारी देकर शांत रखा जा सकता था। साथ ही गेट को बलपूर्वक खोलने की कोशिश भी रोकी जा सकती थी।

लोगों ने खुद संभाला मोर्चा

लिफ्ट के अंदर से लगातार मदद की आवाजें आने पर बाहर मौजूद लोगों ने गेट खोलने की कोशिश शुरू कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि काफी देर तक कोई सुरक्षा कर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। बाद में लोहे की रॉड की मदद से गेट को खोलने का प्रयास किया गया। लोगों का आरोप है कि शुरुआती समय में राहत और बचाव की व्यवस्था नदारद रही।

मॉल प्रबंधन की सफाई

मॉल के ऑपरेशन मैनेजर विदित भार्गव ने घटना को तकनीकी खराबी का परिणाम बताया। उनका कहना है कि बिजली जाने के बाद लिफ्ट ऑटो रेस्क्यू डिवाइस की मदद से फ्लोर तक पहुंच गई थी, लेकिन अंदर मौजूद लोगों द्वारा गेट पर दबाव डालने और उसे खोलने की कोशिश के कारण सेंसर प्रभावित हो गया। उन्होंने दावा किया कि सूचना मिलते ही सुरक्षा कर्मियों और तकनीकी टीम ने राहत कार्य शुरू कर दिया था। घटना के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि जब मॉल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं तो इमरजेंसी कॉल सिस्टम सक्रिय क्यों नहीं था। हेल्पलाइन नंबर रिसीव न होना, अलार्म सिस्टम पर सवाल और रात में ऑपरेटर की अनुपस्थिति ने सुरक्षा मानकों की पोल खोल दी है। लोगों का कहना है कि अगर लिफ्ट में बुजुर्ग, मरीज या अधिक संख्या में बच्चे होते तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

सीओ प्रथम आशुतोष शिवम ने बताया कि तकनीकी कारणों और सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच कराई जा रही है। सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।