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बलरामपुर : भीषण गर्मी को देखते हुए प्रशासन ने जारी किए दिशा-निर्देश

बलरामपुर, 12 मार्च । जिले में बढ़ती गर्मी और लू की संभावना को देखते हुए राज्य शासन के निर्देश पर लू से बचाव एवं प्रबंधन के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत आमजन को लू के लक्षणों की पहचान, बचाव के उपाय और प्रारंभिक उपचार के बारे में जागरूक किया जा रहा है, ताकि आपात स्थिति में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

कलेक्टर राजेन्द्र कटारा ने गुरुवार काे जिले के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे गर्मी से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियां बरतें और तेज धूप में अनावश्यक बाहर निकलने से बचें। उन्होंने कहा कि समय-समय पर पर्याप्त पानी पीते रहें और शरीर में पानी की कमी न होने दें। यदि किसी व्यक्ति में लू के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र से संपर्क करें।

सामान्यतः लू लगने के प्रमुख लक्षणों में सिर में भारीपन और दर्द, तेज बुखार के साथ मुंह का सूखना, चक्कर आना, उल्टी होना, शरीर में कमजोरी और दर्द महसूस होना शामिल है। इसके अलावा शरीर का तापमान अधिक होने के बावजूद पसीना न आना, अत्यधिक प्यास लगना, पेशाब कम आना, भूख कम लगना और बेहोशी भी लू के लक्षण हो सकते हैं। तेज धूप और गर्मी में लंबे समय तक रहने से शरीर में पानी और खनिज, विशेषकर नमक की कमी हो जाती है, जिससे लू लगने की आशंका बढ़ जाती है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विजय कुमार सिंह ने लू से बचाव के उपाय बताते हुए कहा कि अत्यावश्यक न हो तो घर से बाहर न निकलें। धूप में निकलते समय सिर और कान को कपड़े से ढंकें तथा अधिक मात्रा में पानी पिएं। गर्मी के मौसम में हल्के और सूती कपड़े पहनें, ताकि शरीर में हवा का संचार बना रहे और पसीना आसानी से सूख सके। अधिक पसीना आने की स्थिति में ओआरएस घोल का सेवन करना लाभकारी होता है।

उन्होंने बताया कि चक्कर या मितली आने पर तुरंत छायादार स्थान पर आराम करें और यदि संभव हो तो फल का रस, लस्सी या मट्ठा जैसे शीतल पेय का सेवन करें। किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में निशुल्क परामर्श लिया जा सकता है। लू लगने की स्थिति में प्रारंभिक उपचार के रूप में पीड़ित व्यक्ति के सिर पर ठंडे पानी की पट्टी रखें, उसे पर्याप्त मात्रा में पानी या अन्य पेय पदार्थ पिलाएं और जल्द से जल्द नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र या अस्पताल ले जाकर उपचार कराएं।