एसीएस गृह, डीजीपी, भरतपुर कलेक्टर और एसपी आकर बताए पैरोल प्रार्थना पत्रों को उदासीन तरीके से कैसे किया जा रहा है खारिज
जयपुर, 04 मार्च । राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि अदालतों में रोजाना ऐसे मामले आ रहें हैं, जिनमें पैरोल के प्रार्थना पत्रों को अत्यंत लापरवाही और उदासीन तरीके से खारिज कर दिया जाता है। जिससे पैरोल नियमों के मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है और कैदियों के मौलिक अधिकारों का भी हनन होता है। इसके साथ ही अदालत ने एसीएस गृह, डीजीपी और भरतपुर कलेक्टर सहित एसपी को छह मार्च को पेश होकर अपना स्पष्टीकरण देने को कहा है। वहीं अदालत ने एसीएस और डीजीपी को शपथ पत्र पेश कर बताने को कहा है भविष्य में पैरोल प्रार्थना पत्रों को अस्वीकार करने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए क्या किया जाएगा। जस्टिस महेन्द्र गोयल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने यह आदेश अनिल कपूर की पैरोल आपराधिक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
अदालत ने कहा है कि याचिकाकर्ता के पैरोल के प्रकरण पर पुन: विचार कर उस पर पांच दिन में उचित आदेश पारित किया जाए।
याचिका में अधिवक्ता जीपी रावत ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता बीते चार साल से ओपन जेल में रह रहा है और उसने 12 साल की सजा काटने के बाद नियमित पैरोल के लिए आवेदन किया था। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, भरतपुर के संयुक्त निदेशक ने गत 31 अक्टूबर को अपनी रिपोर्ट में याचिकाकर्ता को पैरोल देने की सिफारिश की थी। वहीं स्थानीय एसपी ने गत 20 नवंबर को अपनी रिपोर्ट में कहा कि याचिकाकर्ता अपने माता-पिता से मिलने के लिए पैरोल चाहता है, जबकि उसके पिता स्वस्थ हैं और याचिकाकर्ता के तीन भाई उनकी देखभाल कर रहे हैं। इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी आशंका जताई गई कि यदि उसे पैरोल दी गई तो कोई अप्रिय घटना हो सकती है और वह फरार भी हो सकता है। याचिका में कहा गया कि उसने पैरोल नियमों के तहत नियमित पैरोल के लिए आवेदन किया था, लेकिन एसपी की रिपोर्ट के आधार पर उसे पैरोल नहीं मिली। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने एसीएस गृह और डीजीपी सहित अन्य अफसरों को पेश होने के आदेश दिए हैं।









