खरगोनः कन्या महाविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ शुभारंभ
खरगोन, 06 फरवरी । मध्य प्रदेश के खरगोन में नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय ज्ञान परम्परा की समझ की लक्ष्य को द्वष्ट्रिगत रखते हुए मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग के तत्वाधान में शासकीय कन्या महाविद्यालय में शुक्रवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ।
संगोष्ठी का शुभारम्भ कलेक्टर भव्या मित्तल द्वारा किया गया। शोध संगोष्ठी के कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. आरके यादव ने की। इस दौरान उन्होंने भारतीय ज्ञान सम्परा को प्राचीन इतिहास से लेकर वर्तमान परिप्रेक्ष्य से जोड़ते हुए इसे आगे बढ़ाने का आह्वान किया। समन्वयक राष्ट्रीय शोध संगोष्टी डॉ. धमेन्द्र भालसे ने अतिथियां का परिचय प्रस्तुत किया एवं भारतीय ज्ञान परम्परा विभिन्न पहलूओं से अवगत कराया गया।
इस दौरान कलेक्टर भव्या मित्तल ने नई पीढ़ी एवं महिलाओं की भूमिका को विशेष बल देते हुए छात्राओं को पढ़ने, आगे बढ़ने एवं अपने परम्परागत ज्ञान को सजोए रखने का आहवान किया। अपने भविष्य को सुरक्षित रखने की बात को स्वयं का उदाहरण देते हुए हरिवंश राय बच्चन कि पंक्ति ’’कोशिशा करने वालों कर कभी हार नहीं होती’’ पर अपने बात पूर्ण की। कार्यक्रम से पूर्व कलेक्टर ने महाविद्यालय प्रांगण में पौधारोपण भी किया।
संगोष्ठी में महाराष्ट्र के डॉ. सुधाकर जाधव अपने वक्तव्य में नवीन शिक्षा नीति की आवश्यकता और पुरानी शिक्षा नीति के समन्वय से भविष्य की ओर जाने एवं भारत की गौरवशाली परम्पराओं को योजनाबद्ध तरीके से एक सूत्र पिरोने की बात कही। उन्होंने कहा कि यह केवल भारतीय ज्ञान परम्परा की प्रासंगिकता को ध्यान में रखकर ही किया जा सकता है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सेवन्ती डावर द्वारा किया गया।
प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता एवं मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, महू के कुलगुरू डॉ. सुनील गोयल भारतीय ज्ञान परम्परा के लक्ष्य पर प्रकाश डाला एवं उसके उद्देश्य से छात्राओ को अवगत कराया। डॉ. राजाराम आर्य एवं डॉ. ए.जे.सोलंकी ने भी अपने विचार प्रस्तुत किये। सत्र का संचालन डॉ. ममता गोयल द्वारा किया गया। आज के सत्र में लगभग 50 शोधार्थियों ने पंजीयन कराया। इस अवसर पर महाविद्यालय परिवार के सभी सदस्य एवं छात्राए उपस्थित थी।









