संताें का आह्वान : पेड़ों की रक्षा के लिये सिर कटाएं, अब प्राण त्याग देंगे
बीकानेर, 03 फ़रवरी । खेजड़ी बचाने के लिये सख्त कानून बनाने सहित दो सूत्रीय मांगों को लेकर पर्यावरण संघर्ष समिति के बैनर तले चल रहा आंदोलन और उग्र रूप लेता जा रहा है। जिसके चलते 363 संतों के साथ पर्यावरण प्रेमी ने अनशन-धरना शुरू कर दिया। लोग आंखों पर पट्टी बांध अनशन-धरने पर बैठे हैं। संतों के साथ कई भक्तों ने खाना छोडऩे का निर्णय लिया है।
संत सच्चिदानंद ने बताया कि पत्थर कठोर होता है उसे तोडऩे के लिये कठोर बनना पड़ता है। सरकार नाजुक तरीके से मान रही है। इसलिए साधू संत पर्यावरण प्रेमियों के साथ अनशन पर बैठे है। सरकार एक आदेश जारी कर दें कि खेजड़ी सहित 50 साल पुराना पेड़ किसी भी परियोजना में काटा न जाएं। यदि पेड़ काटता है,उस स्थान के अधिकारियों को पाबंद किया जाएं,उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएं। साथ ही सरकार का एमओयू हुआ है। उसे निरस्त किया जाएं।
संत ने कहा कि सरकार हर बार आश्वासन दे रही है कि कानून बनाएंगे। जब तक सरकार यह नहीं बताएगी आखिर कब कानून बनेगा। तब तक अनशन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि अमृता देवी ने पेड़ों की रक्षा के लिये सिर कटाएं थे। हम कानून ना बनाने पर प्राण त्याग देंगे। साधू संतों ने कहा कि हमारा अंतिम लक्ष्य पेड़ बचाना है। सनातन की सरकार है,परन्तु उस सरकार पर किसी प्रकार की जूं तक नहीं रेंगी। संतों की स्पष्ट मांग है कि जब तक ट्री प्रोटेक्शन एक्ट लागू नहीं हो जाता,तब तक एक पेड़ भी नहीं कटना चाहिए।
कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ने भी इस आन्दोलन का समर्थन करते हुए जल्द कानून बनाने की मांग दोहराई है। पूर्व मंत्री गोविंदराम मेघवाल ने कहा कि सीएम भजनलाल चाहें तो आज ही विधानसभा में घोषणा कर सकते हैं कि ये कानून बनाया जाएगा। दो दिन के अंदर कानून बनना चाहिए।
उधर राजस्थान सहित प्रदेशभर से आए प्रदर्शनकारियों के लिए बिश्नोई धर्मशाला छोटी पड़ गई। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग टैंट में ही सो गए। कुछ लोगों ने रात जागकर ही गुजारी। उधर,पुलिस प्रशासन पूरी तरह हरकत में है। कलेक्ट्रेट पर सुरक्षा के लिए एसटीएफ को तैनात किया गया है। आंदोलन से जुड़े नेताओं से भी लगातार संपर्क किया जा रहा है।









