सीटू शिमला की नई जिला कमेटी गठित, मजदूरों के हक में संघर्ष तेज करने का संकल्प

सम्मेलन को सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, उपाध्यक्ष जगत राम, जिलाध्यक्ष कुलदीप डोगरा, उपाध्यक्ष अजय दुलटा और महासचिव अमित कुमार ने संबोधित किया। नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए चार श्रम कोड मजदूरों के अधिकारों को खत्म कर उन्हें गुलामी की ओर धकेल रहे हैं। इन कानूनों से 70 प्रतिशत उद्योग और 74 प्रतिशत मजदूर श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे, जिससे मजदूरों को हड़ताल करने पर कठोर सजाएं और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि सीटू लगातार न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये प्रतिमाह लागू करने, ठेका और आउटसोर्स कर्मियों को नियमित करने, योजना कर्मियों को स्थायी रोजगार देने, मनरेगा मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन और अधिक कार्य दिवस सुनिश्चित करने, श्रमिक कल्याण बोर्ड से आर्थिक लाभ बहाल करने, आंगनबाड़ी, मिड डे मील और आशा कर्मियों को सरकारी कर्मचारी घोषित करने तथा सभी श्रमिकों के लिए पेंशन सुनिश्चित करने जैसी मांगों पर संघर्षरत है।

नेताओं ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार की नवउदारवादी और पूंजीपति समर्थक नीतियों के कारण देश में बेरोजगारी, गरीबी, असमानता और महंगाई बढ़ी है। उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण, बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश और श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी संशोधन के जरिए कामगार वर्ग को कमजोर कर रही है।

सम्मेलन में यह संकल्प लिया गया कि सीटू मजदूरों के अधिकारों, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा के लिए संघर्ष को और तेज करेगी तथा प्रदेश में मजदूर वर्ग की एकजुटता को मजबूत बनाते हुए हर अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करेगी।