वेतन घोटाला के आरोप में तीन शिक्षकों का डीईओ ने रोका वेतन, मांगा स्पष्टीकरण

जांच में जिन तीन शिक्षकों के नाम सामने आए हैं, उनमें राकेश कुमार महतो, शिक्षक – मारवाड़ी प्लस टू उच्च विद्यालय, चक्रधरपुर; अलोका पुरती, शिक्षक – एसओई स्काट प्लस टू उच्च विद्यालय, चाईबासा (प्रतिनियुक्ति पर राजआनंदपुर विद्यालय) और निलिमा मुक्ता पुरती, शिक्षक – प्रोजेक्ट प्लस टू उच्च विद्यालय, झीलरूवा गोइलकेरा (प्रतिनियुक्ति पर खूंटी विद्यालय) शामिल हैं। विभाग के अनुसार, इन शिक्षकों ने बकाया वेतन दिलाने के नाम पर अन्य शिक्षकों से ऑनलाइन माध्यम से बड़ी रकम वसूली थी।

स्नातकोत्तर प्रशिक्षित शिक्षकों के समूह की लिखित शिकायत के अनुसार, आरोपित शिक्षकों ने वेतन भुगतान कराने के नाम पर लाखों रुपये वसूले और अब तक राशि वापस नहीं की गई। शिकायत पर विभागीय जांच शुरू की गई, जिसमें आरोप सही पाए गए।

शनिवार को डीईओ टोनी प्रेमराज टोप्पो ने कहा कि यह अत्यंत गंभीर मामला है। विभाग ने पहले ही 12 सितंबर को स्पष्ट निर्देश दिया था कि कोई भी व्यक्ति अवैध रूप से पैसा न मांगे। इसके बावजूद यह कृत्य किया गया, जो झारखंड सरकारी सेवक नियमावली के प्रतिकूल है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने तुरंत तीनों शिक्षकों का अक्टूबर माह का वेतन रोक दिया है। साथ ही उन्हें 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण रिपोर्ट जमा करने और पिछले तीन महीने के बैंक स्टेटमेंट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

डीईओ ने चेतावनी दी है कि यदि स्पष्टीकरण असंतोषजनक, झूठा या भ्रामक पाया गया, तो शिक्षकों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें निलंबन सहित अन्य अनुशासनात्मक दंड शामिल होंगे।

इस खुलासे के बाद जिलेभर में शिक्षकों के बीच हड़कंप मच गया है। विभाग ने सभी शिक्षकों को चेतावनी दी है कि किसी भी प्रकार की वित्तीय लेन-देन या वसूली से जुड़े मामलों में सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी सीधे जिला शिक्षा पदाधिकारी को दें।