झारखंड में नेतृत्व के अभाव में लटक गए ज्वलंत मुद्दे : बेसरा

झारखंड के आंदोलनकारी रहे सूर्य सिंह बेसरा ने राज्य की दिशा को लेकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने सोमवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि झारखंड में नेतृत्व के अभाव में ज्वलंत मुद्दे लटक गए हैं। उन्‍होंने कहा कि‍ यह समझ से परे है कि तमाम समस्याओं का कैसे और कौन हल निकालेगा। उन्होंने कहा कि आज झारखंड की राजनीति मुद्दाविहीन और मूल्यविहीन हो चुकी है।

आंदोलनों में सही नेतृत्व का अभाव है। इसके कारण ज्वलंत मुद्दे उलझकर लटक गए हैं।

बेसरा ने 10 बड़े सवाल उठाए हैं। इनमें पेसा कानून की नियमावली अब तक लागू न होना, जंगल-जमीन पर आदिवासियों के अधिकारों से वंचित किया जाना, सीएनटी-एसपीटी एक्ट के बावजूद जमीनों की सुरक्षा न होना, लैंड रेस्टोरेशन एक्ट पर कार्रवाई न होना और वन क्षेत्र में लगातार कमी जैसे अन्‍य कई गंभीर मुद्दे शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि 1932 की स्थानीय नीति, 77 प्रतिशत आरक्षण नीति, संथाली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने के बाद भी शिक्षा-साहित्यिक स्तर पर उपेक्षा और लगातार बदलती सरकारों के बावजूद झारखंड की तस्वीर न बदलना चिंताजनक है।